SEBI अब मार्केट में एक्टिव होने वाले ऑटोनॉमस AI फाइनेंशियल एजेंट्स के लिए सख्त नियम ला रहा है। निवेशकों की सुरक्षा के लिए 'ह्यूमन ओवरसाइट' और 'किल स्विच' जैसे फीचर्स अनिवार्य होंगे।
नियम और जवाबदेही पर जोर
भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) फाइनेंशियल सेक्टर में आर्टिफीसियल इंटेलिजेंस (AI) के इस्तेमाल को लेकर एक स्पष्ट और सुरक्षित रास्ता तैयार कर रहा है। बेंगलुरु में आयोजित 'Surfin AI Fintech Summit' में अधिकारियों ने साफ किया कि अब AI केवल एक सपोर्ट टूल नहीं, बल्कि ट्रांजैक्शंस को अंजाम देने वाला एक सक्रिय एजेंट बन रहा है, जिसके लिए जवाबदेही तय करना जरूरी है।
निवेशकों के लिए क्या बदलेगा?
सबसे बड़ा बदलाव यह है कि अब फाइनेंशियल फैसले लेने वाले सभी AI एजेंट्स का रजिस्टर्ड और ट्रेसेबल होना जरूरी होगा। SEBI के नए फ्रेमवर्क के तहत, कंपनियों को एक अनिवार्य 'Kill Switch' लगाना होगा। इसका मतलब है कि अगर कोई AI सिस्टम अचानक गलत तरीके से काम करने लगता है, तो ह्यूमन ऑपरेटर उसे एक पल में रोक सकेंगे। इससे मार्केट में किसी भी तरह की बड़ी गड़बड़ी को रोकने में मदद मिलेगी।
भारत की बढ़त और रेगुलेशन का तरीका
नोबेल विजेता Michael Spence के अनुसार, भारत के पास अपनी डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर और बेहतरीन तकनीकी टैलेंट की वजह से ग्लोबल AI लीडर बनने का बड़ा मौका है। भारत फिलहाल किसी कठोर 'AI Act' के बजाय एक फ्लेक्सिबल अप्रोच अपना रहा है, ताकि इनोवेशन और मार्केट की स्थिरता दोनों बनी रहे।
फिनटेक कंपनियों के लिए चुनौती
यह बदलाव फिनटेक कंपनियों के बिजनेस मॉडल को प्रभावित करेगा। हालांकि, कंप्लायंस और मॉनिटरिंग सिस्टम में निवेश करने से शुरुआत में ऑपरेटिंग कॉस्ट बढ़ सकती है, लेकिन इससे ऑटोमेटेड सिस्टम्स पर निवेशकों का भरोसा बढ़ेगा। आने वाली तिमाहियों में निवेशकों को यह देखना होगा कि कंपनियां रेगुलेटरी हर्डल्स को कैसे पार करती हैं और उनकी कंप्लायंस कॉस्ट उनके मार्जिन पर कितना असर डालती है।
