भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने रिटेल निवेशकों, खासकर छोटे शहरों के लोगों के लिए कॉर्पोरेट बॉन्ड खरीदना आसान बनाने का प्रस्ताव दिया है। इसके तहत 'फिक्स्ड इनकम चैनल पार्टनर्स' (FICPs) नाम की एक नई व्यवस्था लाई जाएगी। इस कदम का मकसद बॉन्ड की पहुंच बढ़ाना और भारत के ₹60 लाख करोड़ के कॉर्पोरेट बॉन्ड मार्केट का दायरा फैलाना है। इस नए ढांचे पर 11 सितंबर 2026 तक आम जनता से राय मांगी गई है।
बॉन्ड मार्केट में रिटेल निवेशकों को लाने की नई रणनीति
SEBI कॉर्पोरेट बॉन्ड में रिटेल निवेशकों की भागीदारी बढ़ाने के लिए एक बड़ा बदलाव लाने की सोच रहा है। रेगुलेटर ने एक कंसल्टेशन पेपर जारी किया है, जिसमें 'फिक्स्ड इनकम चैनल पार्टनर्स' (FICPs) की एक नई व्यवस्था का प्रस्ताव है। ये पार्टनर्स छोटे शहरों (Tier-II और Tier-III) में मौजूद उन निवेशकों को बॉन्ड मार्केट से जोड़ने का काम करेंगे, जहां अभी तक पहुंच सीमित रही है।
म्यूचुअल फंड मॉडल से प्रेरणा
यह प्रस्ताव म्यूचुअल फंड (Mutual Fund) के डिस्ट्रिब्यूशन मॉडल से प्रेरित है। जिस तरह म्यूचुअल फंड डिस्ट्रीब्यूटर्स ने देश भर के घरों तक अपनी पहुंच बनाई है, उसी तरह FICPs कॉर्पोरेट बॉन्ड मार्केट को आम लोगों तक पहुंचाने में मदद करेंगे। आपको बता दें कि 31 जुलाई 2026 तक भारत का कॉर्पोरेट बॉन्ड मार्केट बढ़कर ₹60 लाख करोड़ से ज्यादा का हो गया है, जबकि 2015 में यह सिर्फ ₹17.5 लाख करोड़ था। इसके बावजूद, इस मार्केट में बड़े निवेशकों जैसे बैंक, बीमा कंपनियां और बड़े फंड्स का दबदबा है।
कौन बन सकता है FICP?
इस नई व्यवस्था के तहत, इंडिविजुअल (व्यक्ति) और नॉन-इंडिविजुअल (संस्थाएं) दोनों ही FICPs के तौर पर रजिस्टर कर सकते हैं। प्रोफेशनलिज्म बनाए रखने के लिए, इंडिविजुअल FICPs की उम्र कम से कम 18 साल होनी चाहिए और उनके पास NISM सीरीज: फिक्स्ड इनकम सिक्योरिटीज का सर्टिफिकेशन होना जरूरी है। जो लोग पहले से म्यूचुअल फंड डिस्ट्रीब्यूटर हैं, उनके लिए यह प्रक्रिया थोड़ी आसान हो सकती है, बशर्ते वे जरूरी सर्टिफिकेशन पास कर लें।
निवेशकों के हितों की सुरक्षा
SEBI ने FICPs के काम करने के तरीकों पर सख्त नियम बनाए हैं ताकि निवेशकों के हितों की रक्षा हो सके। FICPs सिर्फ क्लाइंट ऑनबोर्डिंग, डॉक्यूमेंटेशन और बॉन्ड की खूबियों को समझाने जैसे कामों में मदद कर पाएंगे। वे क्लाइंट के फंड या सिक्योरिटीज को संभालने के लिए अधिकृत नहीं होंगे। सभी ऑर्डर ऑनलाइन बॉन्ड प्लेटफॉर्म प्रोवाइडर (OBPP) के जरिए ही जाएंगे और FICPs क्लाइंट की ओर से किसी भी तरह का भुगतान या पैसा नहीं ले-दे पाएंगे। इसके अलावा, FICPs को उनका कमीशन सिर्फ उस OBPP से मिलेगा जो उन्हें अपॉइंट करेगा। कमीशन की सीमा निवेश राशि का 2.5% तय करने का प्रस्ताव है। क्लाइंट सीधे FICP को कोई फीस नहीं दे पाएंगे।
आगे क्या?
यह प्रस्ताव अभी कंसल्टेशन फेज में है, यानी अंतिम नियम लागू होने से पहले इसमें बदलाव हो सकते हैं। निवेशकों को यह भी ध्यान रखना चाहिए कि बॉन्ड मार्केट में लिक्विडिटी (तरलता) और प्राइस वोलैटिलिटी (कीमतों में उतार-चढ़ाव) जैसे जोखिम हो सकते हैं, जो इक्विटी निवेश से काफी अलग हो सकते हैं। SEBI ने 11 सितंबर 2026 तक इस पर लोगों से राय मांगी है। इसके बाद रेगुलेटर सुझावों की समीक्षा करके अंतिम गाइडलाइंस जारी करेगा।
