भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने 13 अगस्त, 2026 को एक कंसल्टेशन पेपर जारी किया है। इसमें 'Accredited Investor' बनने के नियमों को सरल बनाने का प्रस्ताव है, जिससे AIFs और पोर्टफोलियो मैनेजमेंट सर्विसेज (PMS) जैसे हाई-रिस्क फंड्स में निवेश आसान हो सकेगा। इस नई योजना के तहत, फंड मैनेजर खुद निवेशक की स्थिति की पुष्टि कर सकेंगे और इसमें विदेशी नागरिक भी शामिल होंगे, जिसका मकसद स्पेशलाइज्ड इन्वेस्टमेंट प्रोडक्ट्स में कैपिटल फ्लो बढ़ाना है।
SEBI की नई पहल: निवेश के रास्ते होंगे आसान
13 अगस्त, 2026 को भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने एक कंसल्टेशन पेपर जारी कर अपने 'Accredited Investor' फ्रेमवर्क में बड़े बदलावों का ऐलान किया है। इस कदम का मुख्य उद्देश्य घरेलू और विदेशी निवेशकों के लिए हाई-रिस्क वाले और स्पेशलाइज्ड इन्वेस्टमेंट प्रोडक्ट्स, जैसे कि ऑल्टरनेटिव इन्वेस्टमेंट फंड्स (AIFs) और पोर्टफोलियो मैनेजमेंट सर्विसेज (PMS) में निवेश करना आसान बनाना है।
फिलहाल, 'Accredited Investor' का दर्जा पाने के लिए अक्सर थर्ड-पार्टी एजेंसियों से वेरिफिकेशन कराना पड़ता है। लेकिन SEBI अब यह प्रस्ताव दे रहा है कि फंड मैनेजर खुद ही ऑनबोर्डिंग प्रक्रिया के दौरान निवेशक की स्थिति निर्धारित कर सकेंगे। इससे एडमिनिस्ट्रेटिव बाधाएं कम होंगी और निवेशकों को प्राइवेट मार्केट्स और स्पेशलाइज्ड फाइनेंशियल व्हीकल्स में शामिल होने की प्रक्रिया तेज होगी।
नई सीमाएं और बढ़ाया गया दायरा
इस नए प्रस्ताव के तहत, 'Accredited' माने जाने के लिए वित्तीय मानदंड तय किए गए हैं। एक व्यक्ति को कम से कम ₹5 करोड़ की सिक्योरिटीज होल्ड करनी होंगी, जबकि कॉर्पोरेट एंटिटीज के लिए यह सीमा ₹20 करोड़ रखी गई है। SEBI इस फ्रेमवर्क के दायरे को बढ़ाने पर भी विचार कर रहा है। वर्तमान में यह मुख्य रूप से AIFs पर केंद्रित है, लेकिन नए प्रस्ताव में पोर्टफोलियो मैनेजर्स और अन्य स्पेशलाइज्ड इन्वेस्टमेंट फंड्स को भी शामिल किया जाएगा, जिससे 'Accredited' पार्टिसिपेंट्स के लिए उपलब्ध प्रोडक्ट्स की रेंज बढ़ेगी।
वैश्विक पहुंच और बाजार पर असर
प्रस्ताव का एक अहम हिस्सा भारत के बाहर रहने वाले व्यक्तियों को शामिल करना है। गैर-निवासियों को एक अलग और जटिल प्रक्रिया के बिना 'Accredited Investor' के रूप में योग्य बनाने की अनुमति देकर, SEBI का लक्ष्य भारत के ऑल्टरनेटिव एसेट क्लासेस में अधिक ग्लोबल कैपिटल को आकर्षित करना है। इससे विदेशी पूंजी के प्रवाह में वृद्धि होने की उम्मीद है, क्योंकि यह उन अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के लिए एक प्रमुख बाधा को दूर करता है जो भारत के प्राइवेट और स्पेशलाइज्ड इन्वेस्टमेंट परिदृश्य में निवेश करना चाहती हैं।
निवेशकों के लिए जोखिम और ध्यान देने योग्य बातें
यह समझना महत्वपूर्ण है कि AIFs और PMS जैसे प्रोडक्ट्स आमतौर पर वित्तीय रूप से परिष्कृत प्रतिभागियों के लिए होते हैं और इनमें स्टैंडर्ड म्यूचुअल फंड्स या स्टॉक मार्केट निवेशों से काफी अलग जोखिम होते हैं। मैनेजर-लेड 'Accreditation' की ओर बढ़ने से प्रक्रिया सुव्यवस्थित हो सकती है, लेकिन यह फंड मैनेजर्स पर ऑनबोर्डिंग के दौरान पूरी ड्यू डिलिजेंस (Due Diligence) करने की जिम्मेदारी डालता है। निवेशकों को यह ध्यान रखना चाहिए कि यह प्रस्ताव अभी कंसल्टेशन स्टेज में है, जिसका मतलब है कि इंडस्ट्री की प्रतिक्रिया के आधार पर अंतिम नियम बदले जा सकते हैं। बाजार के लिए मुख्य ध्यान नियम की अंतिम अधिसूचना पर रहेगा और क्या इंडस्ट्री सरलीकृत प्रक्रिया के बाद भी उच्च ड्यू डिलिजेंस मानक बनाए रख पाएगी।
