SEBI का बड़ा ऐलान: अब PMS में विदेशी स्टॉक में निवेश संभव, एंट्री बैरियर भी घटा

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AuthorAditya Rao|Published at:
SEBI का बड़ा ऐलान: अब PMS में विदेशी स्टॉक में निवेश संभव, एंट्री बैरियर भी घटा

SEBI ने पोर्टफोलियो मैनेजमेंट सर्विसेज (PMS) के नियमों में बड़े बदलाव का प्रस्ताव दिया है। अब PMS फंड्स विदेशी सिक्योरिटीज में निवेश कर सकेंगे, जो पहली बार हो रहा है। साथ ही, रेगुलेटर ने 'MF-only' PMS कैटेगरी लाने की बात कही है, जिसमें निवेश की सीमा घटाकर ₹25 लाख कर दी गई है, जो पहले ₹50 लाख थी।

Detailed Coverage

विदेशी बाजारों में निवेश का रास्ता खुला

सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (SEBI) ने पोर्टफोलियो मैनेजमेंट सर्विसेज (PMS) के ढांचे में बड़े बदलावों का सुझाव देते हुए एक कंसल्टेशन पेपर जारी किया है। इसका मकसद पोर्टफोलियो मैनेजर्स को ज़्यादा फ्लेक्सिबिलिटी देना और हाई-नेट-वर्थ इंडिविजुअल्स (HNIs) के लिए निवेश के विकल्पों को बढ़ाना है।

इस प्रस्ताव की सबसे खास बात यह है कि अब पोर्टफोलियो मैनेजर्स क्लाइंट्स के पैसे को विदेशी सिक्योरिटीज में लगा सकेंगे। इसमें लिस्टेड विदेशी इक्विटी, डेट इंस्ट्रूमेंट्स और फॉरेन म्यूचुअल फंड्स के साथ-साथ विदेशी लिस्टेड REITs भी शामिल हैं। हालांकि, इसके लिए फॉरेन एक्सचेंज मैनेजमेंट एक्ट (FEMA) और लिबरलाइज्ड रेमिटेंस स्कीम (LRS) के नियमों का पालन करना होगा और मैनेजर्स को किसी भी विदेशी निवेश से पहले क्लाइंट की खास मंजूरी लेनी होगी।

सिर्फ विदेशी निवेश ही नहीं, SEBI अनलिस्टेड सिक्योरिटीज में भी निवेश की इजाजत देने पर विचार कर रहा है। इससे क्लाइंट्स को प्री-आईपीओ (Pre-IPO) अवसरों और इन्वेस्टमेंट-ग्रेड अनलिस्टेड डेट में निवेश का मौका मिल सकता है। हालांकि, अनलिस्टेड डेट इंस्ट्रूमेंट्स के लिए कुल क्लाइंट एसेट्स का 10% की सीमा तय की गई है।

म्यूचुअल फंड पोर्टफोलियो के लिए नई कैटेगरी

प्रोफेशनल मनी मैनेजमेंट का दायरा बढ़ाने के लिए, SEBI ने एक नई 'MF-only PMS' कैटेगरी का प्रस्ताव रखा है। यह सेगमेंट खासतौर पर म्यूचुअल फंड्स की डायरेक्ट प्लान्स में निवेश के लिए होगा, जिसमें एक्सचेंज ट्रेडेड फंड्स (ETFs) और स्पेशलाइज्ड इन्वेस्टमेंट फंड्स भी शामिल होंगे।

इस स्ट्रक्चर का मकसद निवेशकों के लिए एंट्री बैरियर को कम करना है। इस कैटेगरी के लिए न्यूनतम निवेश ₹25 लाख रखा गया है, जो कि जनरल PMS सेवाओं के मौजूदा ₹50 लाख के थ्रेशोल्ड का आधा है। इसी के साथ, इस खास कैटेगरी को मैनेज करने के लिए एंटिटीज की नेट वर्थ की ज़रूरत भी घटाकर ₹2 करोड़ कर दी गई है, जिससे छोटी या स्पेशलाइज्ड फर्मों के लिए इस स्पेस में आना आसान हो जाएगा।

डेरिवेटिव्स के इस्तेमाल में बदलाव

रेगुलेटर ने डेरिवेटिव्स के इस्तेमाल के लिए भी एक स्पष्ट फ्रेमवर्क का प्रस्ताव दिया है। नए नियमों के तहत, एक्सचेंज-ट्रेडेड डेरिवेटिव्स में कुल एक्सपोजर क्लाइंट के एसेट्स अंडर मैनेजमेंट (AUM) का 1.25 गुना तक सीमित रहेगा। इक्विटी डेरिवेटिव्स में अनहेज़्ड शॉर्ट एक्सपोजर 50% AUM तक सीमित होगा, जबकि ऑप्शन प्रीमियम एक्सपोजर 10% तक कैप किया जाएगा। इन पोज़िशन्स के लिए भी क्लाइंट की स्पष्ट सहमति ज़रूरी होगी।

इन निवेश बदलावों के साथ, SEBI कंप्लायंस और ऑपरेशनल प्रक्रियाओं को भी सरल बनाने की कोशिश कर रहा है, जो कि PMS प्रोवाइडर्स के लिए रेगुलेटरी आवश्यकताओं और पोर्टफोलियो परफॉर्मेंस के बीच संतुलन बनाने में एक बड़ी चुनौती रही है। ये प्रस्ताव फिलहाल कंसल्टेशन फेज में हैं, और निवेशक SEBI से आधिकारिक नोटिफिकेशन का इंतज़ार कर सकते हैं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.