PMS रेगुलेशन्स में बड़े फेरबदल की तैयारी
SEBI, पोर्टफोलियो मैनेजर्स रेगुलेशंस, 2020 की समीक्षा कर रहा है। यह कदम मौजूदा नियमों को बाजार की बदलती गतिशीलता के अनुसार और अधिक प्रभावी बनाने के लिए उठाया जा रहा है। चेयरमैन तुहिन कांता पांडे ने इस बात पर जोर दिया है कि नियमों को और तर्कसंगत (rationalized) बनाया जाएगा। उम्मीद है कि अगले कुछ महीनों में इस संबंध में एक कंसल्टेशन पेपर जारी किया जाएगा। SEBI का लक्ष्य mid-2026 तक इन नए नियमों को लागू करना है। पिछले एक दशक में PMS इंडस्ट्री में एसेट अंडर मैनेजमेंट (AUM) में जबरदस्त बढ़ोतरी हुई है, जो अब ₹5.7 लाख करोड़ से भी अधिक हो गया है। ऐसे में, इन नियमों के अपडेट होने से PMS प्रोवाइडर्स के लिए नई स्पष्टता और संचालन के नए रास्ते खुल सकते हैं। साथ ही, निवेशक सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए निवेश रणनीतियों और जोखिम प्रकटीकरण (risk disclosure) के लिए सख्त गाइडलाइंस भी आ सकती हैं।
'व्हेन लिस्टेड' ट्रेडिंग: ग्रे मार्केट पर लगाम
PMS नियमों की समीक्षा के साथ-साथ, SEBI एक औपचारिक 'व्हेन लिस्टेड' ट्रेडिंग सिस्टम शुरू करने पर भी सक्रिय रूप से विचार कर रहा है। यह कॉन्सेप्ट सॉवरेन बॉन्ड ट्रेडिंग में इस्तेमाल होने वाले 'व्हेन इशूड' (When Issued) मार्केट जैसा है, जहाँ सिक्योरिटीज को उनकी आधिकारिक लिस्टिंग से पहले ट्रेड किया जाता है। इस नई व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य उन कंपनियों के शेयरों को IPO प्रक्रिया शुरू होने से पहले ट्रेड करने की अनुमति देना है, जो IPO लाने वाली हैं।
SEBI का मानना है कि इससे अनौपचारिक और अपारदर्शी 'ग्रे मार्केट' में होने वाली ट्रेडिंग को एक रेगुलेटेड और पारदर्शी ढांचे में लाया जा सकेगा। यह IPO से पहले प्राइस डिस्कवरी (price discovery) को बेहतर बनाने में मदद करेगा, जिससे लिस्टिंग के समय शेयरों में होने वाली अत्यधिक अस्थिरता (volatility) को कम किया जा सके। हालाँकि, इस कदम से अटकलों (speculative activity) के बढ़ने और मार्केट मैनिपुलेशन (market manipulation) के जोखिमों को लेकर चिंताएं भी हैं।
संभावित जोखिम और आगे का रास्ता
SEBI का इरादा बाजार की अखंडता (market integrity) को बढ़ाना है, लेकिन इन प्रस्तावित बदलावों में कुछ जोखिम भी शामिल हैं। PMS इंडस्ट्री के लिए, नियमों के सख्त होने से ऑपरेशनल लागत बढ़ सकती है और छोटे फंड मैनेजर्स के लिए अनुपालन का बोझ (compliance burden) बढ़ सकता है। 'व्हेन लिस्टेड' ट्रेडिंग के मामले में, सबसे बड़ी चिंता यह है कि कहीं यह सिस्टम नए तरह की अटकलों या मूल्य हेरफेर का जरिया न बन जाए।
आने वाले महीनों में कंसल्टेशन पेपर जारी होना SEBI की नियामक सुधार प्रक्रिया में अगला महत्वपूर्ण कदम होगा। बाजार सहभागियों (market participants) की नज़रें 'व्हेन लिस्टेड' ट्रेडिंग मैकेनिज्म के डिजाइन और इसमें लागू किए जाने वाले सुरक्षा उपायों पर होंगी। विश्लेषकों का मानना है कि ये सुधार भारत के वित्तीय बाजार के विकास के लिए महत्वपूर्ण हैं, लेकिन इनकी सफलता प्रभावी कार्यान्वयन (implementation) और SEBI की निरंतर निगरानी (supervision) क्षमता पर निर्भर करेगी। यह भारत में एक अधिक परिष्कृत वित्तीय बाजार इंफ्रास्ट्रक्चर की ओर एक व्यापक बदलाव का संकेत देता है।