SEBI का नया नियम: एक्सपायरी पर 'कैलेंडर स्प्रेड' के फायदे खत्म
SEBI ने गुरुवार देर रात यह घोषणा की कि 5 मई, 2026 से सिंगल स्टॉक डेरिवेटिव्स के एक्सपायरी वाले दिन अब कैलेंडर स्प्रेड के लाभ नहीं मिलेंगे। अब तक, ट्रेडर एक्सपायरी के दिन स्प्रेड पोजीशन पर मार्जिन (Margin) की छूट का फायदा उठा सकते थे, जिससे उनकी पूंजी की जरूरतें कम रहती थीं। लेकिन नए नियम के तहत, एक्सपायरी के दिन इन स्प्रेड्स को दो अलग-अलग लेग्स (Independent Legs) माना जाएगा, जिसके लिए मार्जिन की मांग बढ़ जाएगी। SEBI का यह कदम सिस्टमेटिक रिस्क (Systemic Risk) को कम करने और बाजार की स्थिरता बढ़ाने के लिए उठाया गया है।
ब्रोकर स्टॉक्स पर असर: 'एंजल वन', 'ग्रो' में गिरावट
इस रेगुलेटरी बदलाव का सीधा असर उन ब्रोकरेज फर्मों पर पड़ा है जो डेरिवेटिव ट्रेडिंग पर काफी हद तक निर्भर हैं। शेयर बाजार में शुक्रवार, 6 फरवरी, 2026 को Angel One और Groww (Billionbrains Garage Ventures) के शेयरों में करीब 3% तक की गिरावट दर्ज की गई। वहीं, BSE और 5paisa Capital के शेयरों में 1% से 2% तक की मामूली गिरावट आई। हालांकि, बाद में शेयरों में कुछ हद तक रिकवरी भी देखने को मिली। Angel One भारत का सबसे बड़ा लिस्टेड रिटेल स्टॉकब्रोकर है, जबकि Groww एक प्रमुख फिनटेक प्लेटफॉर्म है। इन कंपनियों के बिजनेस मॉडल के लिए डेरिवेटिव ट्रेडिंग वॉल्यूम (Trading Volumes) एक महत्वपूर्ण रेवेन्यू (Revenue) स्रोत है।
मार्जिन और लिक्विडिटी पर क्या होगा असर?
नए नियम लागू होने के बाद, जो ट्रेडर सिंगल स्टॉक डेरिवेटिव्स में कैलेंडर स्प्रेड स्ट्रेटेजी का इस्तेमाल करते हैं, उन्हें एक्सपायरी के दिन ज्यादा मार्जिन जमा करना होगा। इससे ट्रेडिंग की लागत बढ़ सकती है और एक्सपायरी सेशन के दौरान लिक्विडिटी (Liquidity) यानी खरीद-बिक्री की आसानी कम हो सकती है। Groww का मार्केट कैप (Market Cap) 4 फरवरी 2026 तक करीब ₹1,05,044 करोड़ था, जबकि Angel One का मार्केट कैप 6 फरवरी 2026 तक लगभग ₹23,990 करोड़ था। ये आंकड़े बाजार में इन कंपनियों पर भरोसे को दर्शाते हैं, लेकिन रेगुलेटरी बदलावों से भविष्य के ट्रेडिंग वॉल्यूम और रेवेन्यू पर अनिश्चितता के बादल मंडरा सकते हैं।
वैल्यूएशंस और आगे का रास्ता
भारतीय स्टॉकब्रोकिंग सेक्टर में Zerodha, Groww और 5paisa जैसी कंपनियों के बीच कड़ी प्रतिस्पर्धा है। BSE जैसे एक्सचेंज का आय का जरिया विविध है, लेकिन डेरिवेटिव वॉल्यूम भी उनके लिए मायने रखता है। इस नए नियम से उन ब्रोकर्स की कॉम्पिटिटिव पोजिशन (Competitive Position) पर असर पड़ सकता है जो डेरिवेटिव प्रोडक्ट्स में माहिर हैं। फरवरी 2026 की शुरुआत में Angel One का P/E रेश्यो (P/E Ratio) लगभग 31.21, BSE का 68.5, 5paisa Capital का 24.10 और Groww का 61.65 था। SEBI द्वारा नियमों में बदलाव का यह फैसला, जो 5 मई, 2026 से लागू होगा, मार्केट पार्टिसिपेंट्स को अपनी स्ट्रेटेजी एडजस्ट करने का मौका देगा। हालांकि, भारत इक्विटी डेरिवेटिव्स ट्रेडिंग वॉल्यूम के मामले में एक बड़ा वैश्विक खिलाड़ी है, इसलिए यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि यह कदम सिस्टमेटिक जोखिम को कम करते हुए बाजार की लिक्विडिटी को कितना प्रभावित करता है।