SEBI ने साफ कर दिया है कि डिस्क्रिशनरी पोर्टफोलियो मैनेजमेंट सर्विसेज (D-PMS) के ग्राहक अब अपनी डीमैट में रखी सिक्योरिटीज को पर्सनल लोन लेने के लिए गिरवी रख सकते हैं। इस फैसले से निवेशकों को अपने लंबे समय के निवेश को बेचे बिना लिक्विडिटी (तरलता) हासिल करने का मौका मिलेगा। यह गिरवी क्लाइंट की मर्जी से ही शुरू होगी और जब तक यह सक्रिय है, तब तक ये एसेट्स पोर्टफोलियो मैनेजर के AUM (Assets Under Management) का हिस्सा बने रहेंगे।
SEBI की तरफ से मिली बड़ी राहत
भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) ने एक महत्वपूर्ण अनौपचारिक मार्गदर्शन जारी किया है। इसके तहत, डिस्क्रिशनरी पोर्टफोलियो मैनेजमेंट सर्विसेज (D-PMS) के ग्राहक अब अपनी सिक्योरिटीज को गिरवी रखकर पर्सनल लोन ले सकेंगे। इस कदम से हाई-नेट-वर्थ वाले निवेशकों को काफी वित्तीय सुविधा मिलने की उम्मीद है, क्योंकि वे अपने मौजूदा स्टॉक पोर्टफोलियो को बेचे बिना अपनी तत्काल वित्तीय जरूरतों को पूरा कर पाएंगे।
क्या है पूरा मामला?
यह स्पष्टीकरण 'शेयर इंडिया सिक्योरिटीज लिमिटेड' के एक अनुरोध के जवाब में आया है। कंपनी ने यह जानना चाहा था कि क्या D-PMS खाते के तहत रखी गई सिक्योरिटीज का इस्तेमाल उधार लेने के लिए कोलैटरल (संपार्श्विक) के तौर पर किया जा सकता है। SEBI ने पुष्टि की कि PMS रेगुलेशन, 2020 के तहत पोर्टफोलियो मैनेजरों द्वारा क्लाइंट की ओर से फंड या सिक्योरिटीज उधार लेने पर लगी रोक, क्लाइंट को अपनी संपत्ति गिरवी रखने से नहीं रोकती है।
मालिकाना हक का सिद्धांत
इस फैसले का मुख्य आधार 'बेनिफिशियल ओनरशिप' (लाभकारी स्वामित्व) का सिद्धांत है। चूंकि सिक्योरिटीज क्लाइंट के अपने डीमैट खाते में एक स्वीकृत कस्टोडियन के पास रखी जाती हैं, इसलिए क्लाइंट को उन्हें कोलैटरल के रूप में उपयोग करने का अधिकार है। SEBI ने स्पष्ट किया कि जब तक गिरवी क्लाइंट की अपनी मर्जी से और उनके अपने फायदे के लिए रखी जाती है, तब तक इसे पोर्टफोलियो मैनेजर द्वारा उधार लेना नहीं माना जाएगा।
AUM पर क्या होगा असर?
रेगुलेटरी और रिपोर्टिंग के नजरिए से, जब तक गिरवी सक्रिय है, तब तक ये एसेट्स पोर्टफोलियो मैनेजर के एसेट्स अंडर मैनेजमेंट (AUM) में शामिल रहेंगे। सिक्योरिटीज का लाभकारी स्वामित्व केवल तभी कर्जदाता को हस्तांतरित होगा जब किसी डिफॉल्ट या मार्जिन कॉल के कारण गिरवी को इनवोक (लागू) किया जाता है। इससे यह सुनिश्चित होता है कि लोन की अवधि के दौरान पोर्टफोलियो मैनेजर की रिपोर्टिंग सुसंगत बनी रहे।
जोखिमों पर भी ध्यान दें
हालांकि यह निर्णय लिक्विडिटी के लिए एक नया रास्ता खोलता है, निवेशकों को इससे जुड़े जोखिमों पर भी विचार करना चाहिए। सिक्योरिटीज को गिरवी रखने की क्षमता अंतर्निहित एसेट्स की लिक्विडिटी पर निर्भर करती है। यदि कोई क्लाइंट अस्थिर या कम लिक्विड स्टॉक गिरवी रखता है और बाजार मूल्य में काफी गिरावट आती है, तो उन्हें मार्जिन कॉल का सामना करना पड़ सकता है, जिसके लिए लोन बनाए रखने के लिए अतिरिक्त नकदी या कोलैटरल प्रदान करने की आवश्यकता होगी। इसके अलावा, निवेशकों को पोर्टफोलियो मैनेजर, कस्टोडियन और कर्जदाता के बीच दस्तावेजीकरण और प्रक्रिया की पूरी स्पष्टता सुनिश्चित करनी चाहिए ताकि किसी भी तरह की ऑपरेशनल गड़बड़ी से बचा जा सके। चूंकि यह एक अनौपचारिक मार्गदर्शन है, इसलिए निवेशकों और पोर्टफोलियो मैनेजरों से अपेक्षा की जाती है कि वे सभी मौजूदा PMS नियमों और प्रकटीकरण मानदंडों का पालन करते रहें।
