SEBI चीफ की नसीहत: एसेट मैनेजमेंट कंपनियों को अब सिर्फ AUM नहीं, निवेशकों के रिटर्न पर देना होगा ध्यान!

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
SEBI चीफ की नसीहत: एसेट मैनेजमेंट कंपनियों को अब सिर्फ AUM नहीं, निवेशकों के रिटर्न पर देना होगा ध्यान!

SEBI के चेयरमैन तुहिन कांता पांडे ने एसेट मैनेजमेंट कंपनियों (AMCs) को सख्त हिदायत दी है कि वे सिर्फ एसेट्स अंडर मैनेजमेंट (AUM) बढ़ाने पर ध्यान न दें, बल्कि निवेशकों को मिलने वाले असल रिटर्न को प्राथमिकता दें। उन्होंने कहा कि भले ही इंडस्ट्री का AUM **₹86 लाख करोड़** तक पहुंच गया हो, असली सफलता 6 करोड़ निवेशकों को दिए गए वैल्यू से मापी जाएगी। यह सलाह ऐसे समय आई है जब इक्विटी में निवेश में नरमी देखी जा रही है और डिजिटल व AI-आधारित ऑपरेशंस पर सख्ती बढ़ाई जा रही है।

एसेट बढ़ाने से ज्यादा जरूरी है निवेशकों का मुनाफा

भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) के चेयरमैन तुहिन कांता पांडे ने म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री को एक बड़ा संदेश दिया है। उन्होंने कहा है कि अब फंड हाउस को केवल एसेट्स अंडर मैनेजमेंट (AUM) बढ़ाने की दौड़ से बाहर निकलकर निवेशकों को मिलने वाले असल मुनाफे (tangible returns) पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। एसोसिएशन ऑफ म्यूचुअल फंड्स इन इंडिया (AMFI) के फाउंडेशन डे पर बोलते हुए, पांडे ने जोर दिया कि भले ही इंडस्ट्री ₹86 लाख करोड़ के बड़े AUM के आंकड़े तक पहुंच गई हो, लेकिन असली सफलता इसी बात से मापी जानी चाहिए कि 6 करोड़ अनोखे निवेशकों (unique investors) के लिए कितना वैल्यू तैयार किया गया है।

गिरते निवेश और बढ़ती निगरानी का दौर

यह सलाह ऐसे नाजुक समय पर आई है जब म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री बाजार की बदलती गतिशीलता से जूझ रही है। जहां इंडस्ट्री ने लंबे समय में ग्रोथ देखी है, वहीं हालिया जुलाई 2026 के आंकड़ों में इक्विटी म्यूचुअल फंड में निवेश (equity mutual fund inflows) में 42% की साल-दर-साल गिरावट दर्ज की गई है। यह निवेश प्रवाह में कमी फंड हाउसेज के लिए यह साफ संकेत है कि उन्हें निवेशकों के नतीजों और पारदर्शिता में सुधार करना होगा, क्योंकि रिटेल निवेशकों का भरोसा बाजार की अस्थिरता और प्रदर्शन के प्रति बेहद संवेदनशील रहता है। रेगुलेटर यह साफ कर रहा है कि AUM की ग्रोथ अच्छे निवेश निर्णयों या सही रिस्क कम्युनिकेशन की कीमत पर नहीं आनी चाहिए।

डिजिटल युग में बढ़ी जिम्मेदारियां

SEBI चेयरमैन ने इस बात पर भी जोर दिया कि जैसे-जैसे इंडस्ट्री डिजिटल और ऑटोमेटेड भविष्य की ओर बढ़ रही है, एसेट मैनेजमेंट कंपनियों को अपनी फिड्यूशियरी ड्यूटी (fiduciary duties) के प्रति और अधिक जिम्मेदार बनना होगा। इसमें कठोर ड्यू डिलिजेंस, निवेशकों के डेटा की सुरक्षा, और यह सुनिश्चित करना शामिल है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) जैसी नई तकनीकों का इस्तेमाल नैतिक मानकों से समझौता न करे। SEBI वर्तमान में कैपिटल मार्केट्स में AI और मशीन लर्निंग के इस्तेमाल को नियंत्रित करने के लिए व्यापक फ्रेमवर्क पर काम कर रहा है, जिसके तहत वित्तीय संस्थानों से सख्त मानवीय निगरानी और अनिवार्य आपातकालीन सुरक्षा उपायों की मांग की जा सकती है।

निवेशक शिक्षा और वितरण पर जोर

अनोखे निवेशकों की संख्या को 12 करोड़ तक पहुंचाने के लक्ष्य के साथ, रेगुलेटर ने संकेत दिया कि इंडस्ट्री को अपने वितरण नेटवर्क (distribution networks) को मजबूत करने और निवेशक शिक्षा पर ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता है। SEBI म्यूचुअल फंड वितरकों के लिए रेगुलेटरी फ्रेमवर्क की भी समीक्षा कर रहा है और पोर्टफोलियो मैनेजमेंट सर्विसेज (PMS) के लिए नए नियमों पर भी विचार कर रहा है। निवेशकों के लिए, यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि शासन (governance) और पारदर्शिता के लिए ये विकसित नियामक अपेक्षाएं आने वाली तिमाहियों में एसेट मैनेजमेंट कंपनियों की लागत संरचनाओं, सेवा मॉडल और अंततः प्रदर्शन को कैसे प्रभावित करेंगी।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.