SEBI का निवेशकों के भरोसे पर जोर
भारतीय मार्केट रेगुलेटर SEBI ने फाइनेंशियल मार्केट्स में निवेशकों का भरोसा और विश्वसनीयता फिर से बनाने के मकसद से कॉन्फ्लिक्ट-ऑफ-इंटरेस्ट (Conflict of Interest) के नियमों को और कड़ा करने की मंजूरी दे दी है। इन नए उपायों का लक्ष्य रेगुलेटरी गैप्स को भरना और सीनियर मैनेजमेंट से जुड़े संभावित हितों के टकराव को रोकना है।
नए रेगुलेशंस में कर्मचारियों के जीवनसाथी और डिपेंडेंट्स (dependents) के इन्वेस्टमेंट्स (investments) पर रोक, साथ ही जहाँ भी हितों का टकराव हो सकता है, वहाँ मैंडेटरी डिस्क्लोजर्स (mandatory disclosures) और डिसीज़न्स (decisions) से रिक्यूजल (recusal) शामिल हैं। इसका उद्देश्य फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशंस (financial institutions) में एथिकल प्रैक्टिसेज़ (ethical practices) को मजबूत करना है।
ग्लोबल ट्रेड में 'पेट्रोयुआन' का बढ़ता दबदबा
इस बीच, ग्लोबल फाइनेंशियल मार्केट्स में बड़े बदलाव देखे जा रहे हैं। 'पेट्रोयुआन' (Petroyuan) खुद को एक ट्रेड टूल (trade tool) के तौर पर साबित कर रहा है, हालांकि स्ट्रक्चरल लिमिटेशन्स (structural limitations) के कारण यह बड़ी ग्लोबल रिजर्व करेंसीज़ (reserve currencies) को रिप्लेस करने की संभावना कम है।
ट्रेड्स को सेटल करने (settling trades) और संभावित रूप से सैंक्शंस (sanctions) को इवेड (evade) करने में इसके बढ़ते इस्तेमाल से इंटरनेशनल कॉमर्स (international commerce) के लिए नई चुनौतियाँ और मौके पैदा हो रहे हैं।
भारत की बदली हुई फाइनेंशियल स्ट्रैटेजी
इन बदलावों से निपटने के लिए, भारत रुपये-आधारित ट्रेड अरेंजमेंट्स (rupee-based trade arrangements) को बढ़ाने और करेंसी स्वैप एग्रीमेंट्स (currency swap agreements) को बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित कर रहा है। इस एवॉल्विंग लैंडस्केप (evolving landscape) को मैनेज करने के लिए मजबूत क्रॉस-बॉर्डर पेमेंट सिस्टम्स (cross-border payment systems) विकसित करना महत्वपूर्ण है।
हालांकि, अधिकारी एक ही फाइनेंशियल सिस्टम, जैसे कि चीन के सिस्टम पर अत्यधिक रिलायन्स (reliance) होने से बचने की सलाह देते हैं, ताकि एक डिपेंडेंसी (dependency) को दूसरी से बदला न जा सके।
एयर पैसेंजर्स के अधिकारों के लिए नए नियम
एक अलग कदम में, भारत के डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन (DGCA) ने एयर पैसेंजर्स के अधिकारों की सुरक्षा के उद्देश्य से नए डायरेक्टिव्स (directives) जारी किए हैं। यह रेगुलेटर उन मार्केट्स में हस्तक्षेप कर रहा है, जिन पर काफी हद तक IndiGo और Air India जैसी कंपनियां डोमिनेट (dominate) करती हैं, ताकि एक्सपेंडेड सीट सिलेक्शन फीस (expanded seat selection fees) से जुड़ी अनफेयर कॉस्ट्स (unfair costs) को संबोधित किया जा सके।
ये नियम ऑपरेशनल डिसरप्शन्स (operational disruptions) के लिए एयरलाइन अकाउंटेबिलिटी (airline accountability) को भी मजबूत करते हैं, यह सुनिश्चित करते हुए कि फ्लाइट डिसरप्शन्स (flight disruptions) के दौरान पैसेंजर्स को बेहतर सुरक्षा मिले।