सुप्रीम कोर्ट ने देश में बिना बीमा (Insurance) दौड़ रहे **16.54 करोड़** वाहनों की समस्या को देखते हुए नए वाहनों के लिए बीमा अवधि को बढ़ाने का आदेश दिया है। इस फैसले से इंश्योरेंस सेक्टर में नई उम्मीदें जगी हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने 4 अगस्त, 2026 को एक ऐतिहासिक निर्देश जारी किया है, जिसका मकसद भारत में बिना इंश्योरेंस के चल रहे 56% वाहनों की समस्या को खत्म करना है। आंकड़ों के अनुसार, देश में करीब 16.54 करोड़ वाहन बिना वैध बीमा के चल रहे हैं। इसे देखते हुए कोर्ट ने नियम बनाया है कि अब नए प्राइवेट कारों के लिए 4 साल का थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस और दोपहिया वाहनों के लिए 6 साल का कवर लेना अनिवार्य होगा।\n\nइस फैसले के बाद से ICICI Lombard, New India Assurance और Go Digit जैसी बड़ी कंपनियों के शेयरों में निवेशकों की दिलचस्पी बढ़ी है। हालांकि, मार्केट जानकारों का मानना है कि इंश्योरेंस कंपनियों के लिए यह वॉल्यूम तो बढ़ाएगा, लेकिन मुनाफा कमाना इतना आसान नहीं होगा क्योंकि भारत में थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस की कीमतें IRDAI द्वारा रेगुलेट की जाती हैं।\n\n### क्या है 'No Insurance, No Fuel' प्लान?\n\nकोर्ट ने तकनीक के जरिए सख्ती बरतने के निर्देश दिए हैं। इसमें 'No Insurance, No Fuel' प्रोजेक्ट शामिल है, जिसके तहत पेट्रोल पंप पर फ्यूल लेते समय बीमा स्टेटस चेक किया जाएगा। साथ ही, ANPR (Automatic Number Plate Recognition) सिस्टम को VAHAN डेटाबेस से जोड़ने को कहा गया है।\n\n### निवेशकों के लिए क्या है रिस्क?\n\nलंबी अवधि के बीमा प्रीमियम से ग्राहकों पर शुरुआती बोझ बढ़ेगा, जिसका असर एंट्री-लेवल गाड़ियों की सेल्स पर पड़ सकता है। इसके अलावा, अगर भविष्य में क्लेम रेश्यो (Claims Ratio) बढ़ता है, तो कंपनियों के मार्जिन पर दबाव पड़ सकता है। अब निवेशकों की नजर सरकार द्वारा जारी होने वाले नोटिफिकेशन और इस पायलट प्रोजेक्ट के रोलआउट टाइमलाइन पर है।
