State Bank of India (SBI) अब छोटे कारोबारियों के लिए UPI ट्रांजैक्शन हिस्ट्री के आधार पर लोन देने की तैयारी कर रहा है। इस कदम से उन व्यापारियों को बड़ी राहत मिलेगी जो GST रजिस्टर्ड नहीं हैं, लेकिन निवेशकों के लिए रिस्क असेसमेंट पर नजर रखना जरूरी होगा।
UPI डेटा बनेगा लोन का आधार
State Bank of India (SBI) अपनी डिजिटल लेंडिंग को नई ऊंचाइयों पर ले जाने की तैयारी में है। ग्लोबल फिनटेक फेस्ट 2026 में बैंक के MD अश्विनी कुमार तिवारी ने साफ किया कि अब UPI ट्रांजैक्शन डेटा का इस्तेमाल छोटे बिजनेस की क्रेडिट वर्थनेस (Creditworthiness) जांचने के लिए किया जाएगा। यह उन असंगठित क्षेत्र के व्यापारियों के लिए एक बड़ी पहल है जिनके पास अक्सर GST रजिस्ट्रेशन नहीं होता।
बैंक की मौजूदा रणनीति
फिलहाल बैंक GST रजिस्टर्ड कंपनियों को महज 10 मिनट में लोन देने की सुविधा दे रहा है। पिछले 18 महीनों में बैंक ने इस मॉडल के जरिए ₹1 लाख करोड़ का क्रेडिट बांटा है। लेकिन इस सिस्टम में उन छोटे मर्चेंट्स का क्या, जो औपचारिक टैक्स नेटवर्क का हिस्सा नहीं हैं? इसी गैप को भरने के लिए बैंक ने नई योजना बनाई है।
कैसे काम करेगा नया सिस्टम?
बैंक अब UPI पेमेंट डेटा को सेल्स के प्रॉक्सी (Proxy) के रूप में इस्तेमाल करेगा। ग्राहकों की सहमति से टेलीकॉम रिकॉर्ड्स और अन्य डिजिटल फुटप्रिंट्स को जोड़कर एक मजबूत क्रेडिट प्रोफाइल तैयार किया जाएगा। बैंक का लक्ष्य 24 घंटे के भीतर डिजिटल फाइनेंसिंग पूरी करने का है।
निवेशकों के लिए जोखिम और अवसर
यह कदम बैंक के लोन बुक को तेजी से बढ़ाने में मदद तो करेगा, लेकिन जोखिम भी साथ लाएगा। असंगठित क्षेत्र में लोन देना हमेशा चुनौतीपूर्ण रहा है। बाजार के जानकारों और निवेशकों की नजर इस बात पर होगी कि क्या बैंक का नया रिस्क मॉडलिंग खराब कैश फ्लो और डिफॉल्ट की पहचान करने में सक्षम होगा या नहीं। साथ ही, अलग-अलग थर्ड-पार्टी ऐप्स से डेटा को इंटीग्रेट करना भी बैंक के सामने एक तकनीकी चुनौती बनी रहेगी।
