मुंबई बेंच ने SBI की याचिका को स्वीकार करते हुए वेणुगोपाल धूत, वीडियोकॉन ग्रुप के पूर्व मैनेजिंग डायरेक्टर, के खिलाफ इंसॉल्वेंसी कार्यवाही शुरू करने की मंजूरी दे दी है। इंसॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड (IBC) की धारा 95 के तहत यह आदेश जारी हुआ है। अब SBI, धूत की निजी संपत्तियों से ₹6,157.57 करोड़ की वसूली की कोशिश कर सकेगा। धूत ने वीडियोकॉन इंडस्ट्रीज लिमिटेड और वीडियोकॉन टेलीकम्युनिकेशंस लिमिटेड के लिए बड़े लोन की पर्सनल गारंटी दी थी, और यह डिफॉल्ट फरवरी 2018 से चल रहा है।
यह कार्रवाई ₹61,700 करोड़ के कथित बैंक लोन धोखाधड़ी के बड़े मामले से जुड़ी है। यह घोटाला मोजाम्बिक में वीडियोकॉन की ऑयल और गैस संपत्तियों के फाइनेंसिंग से जुड़ा है। एनफोर्समेंट डायरेक्टरेट (ED) पहले से ही मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों की जांच कर रहा है। NCLT ने धूत पर अगले 180 दिनों के लिए सभी कर्जों और कानूनी कार्रवाइयों पर रोक (मोरेटोरियम) लगा दी है, ताकि एक रेजोल्यूशन प्रोफेशनल प्रक्रिया को आगे बढ़ा सके।
पृष्ठभूमि में देखें तो, भारतीय बैंकिंग सेक्टर, खासकर SBI जैसे पब्लिक सेक्टर बैंक, अब काफी मजबूत स्थिति में हैं। सितंबर 2025 तक, बैंकों के ग्रॉस नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स (NPA) घटकर 2.15% के निम्न स्तर पर आ गए थे। हालांकि, IBC के तहत पर्सनल गारंटी से वसूली की दरें अभी भी बहुत अधिक नहीं हैं, जो जून 2025 तक लगभग 2-2.16% आंकी गई थी। इससे पहले, वीडियोकॉन ग्रुप पर खुद ₹88,000 करोड़ तक के दावे दर्ज किए गए थे, जो मामले की गंभीरता को दर्शाता है।
हालांकि, धूत की संपत्ति से वसूली की राह चुनौतियों से भरी है। वीडियोकॉन ग्रुप की वित्तीय जटिलताएँ और कई सालों तक चलने वाली कथित धोखाधड़ी, जिसमें फंड डायवर्जन शामिल है, इसे एक लंबा और कठिन कानूनी सफर बना सकती है। पूर्व में ICICI बैंक और वीडियोकॉन लोन स्कैम जैसे विवाद भी सामने आ चुके हैं, जिसमें पूर्व CEO चंदा कोचर को भी आरोपी बनाया गया था। इन सब बातों के चलते, पर्सनल गारंटी से वास्तविक वसूली की उम्मीदें सीमित हो सकती हैं।
SBI, भारत का सबसे बड़ा पब्लिक सेक्टर बैंक होने के नाते, इस तरह की वसूली प्रक्रियाओं को संभालने में सक्षम है। अप्रैल 2026 तक, SBI का शेयर लगभग ₹770 पर कारोबार कर रहा था, और विश्लेषक इसकी मजबूत एसेट क्वालिटी और ग्रोथ की संभावनाओं को लेकर सकारात्मक हैं। वेणुगोपाल धूत के खिलाफ यह इंसॉल्वेंसी कार्यवाही, इस बड़े वित्तीय खेल का एक अहम हिस्सा है, लेकिन अंतिम परिणाम कई कानूनी और वसूली संबंधी बाधाओं पर निर्भर करेगा।