State Bank of India (SBI) ने तय डेडलाइन से पहले ही 'डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन एक्ट' (DPDP) को लागू करने की तैयारी शुरू कर दी है। मई 2027 की समय सीमा से पहले ही बैंक इसे दिसंबर 2026 तक पूरा करना चाहता है, हालांकि बैंकिंग नियमों के साथ तालमेल बिठाना बैंक के लिए बड़ी चुनौती है।
नियम और कानून का संतुलन
इतने बड़े बैंक के लिए यह बदलाव सिर्फ सॉफ्टवेयर अपडेट तक सीमित नहीं है, बल्कि यह डेटा मैनेजमेंट के तरीके में एक बड़े बदलाव की तरह है। बैंक को अब DPDP की जरूरतों और पुराने बैंकिंग कानूनों के बीच संतुलन बनाना है। उदाहरण के लिए, नया कानून ग्राहकों को अपना डेटा डिलीट करने का अधिकार देता है, लेकिन RBI के कड़े नियम और Prevention of Money Laundering Act (PMLA) बैंकों को कई सालों तक KYC और ट्रांजेक्शन रिकॉर्ड रखने के लिए मजबूर करते हैं। इन विरोधाभासी नियमों के बीच कानूनी दायित्वों को पूरा करना बैंक के लिए एक जटिल टास्क है।
रिस्क और जुर्माना
सिस्टम अपग्रेड की लागत भले ही ज्यादा है, लेकिन यह भविष्य के बड़े जुर्माने से बचने के लिए जरूरी है। नियमों का पालन न करने पर DPDP एक्ट के तहत प्रति डेटा उल्लंघन ₹250 करोड़ तक का भारी जुर्माना लग सकता है। इसके अलावा, पुरानी बैंकिंग प्रणालियों के साथ नए डेटा टूल्स को जोड़ना चुनौतीपूर्ण है, जिससे अगर सावधानी न बरती गई तो सेवा में रुकावट आ सकती है।
मार्केट का हाल
11 सितंबर, 2026 तक SBI का शेयर करीब ₹998 के स्तर पर ट्रेड कर रहा था। फिलहाल बाजार रेगुलेटरी बदलावों और लिक्विडिटी जैसे फैक्टर्स पर नजर बनाए हुए है। निवेशकों को बैंक के मैनेजमेंट कमेंट्री का इंतजार है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि प्राइवेसी कानून और डेटा रिटेंशन के बीच का टकराव कैसे सुलझाया जाएगा।
