देश के सबसे बड़े बैंक SBI ने साल 2030 तक अपने कुल बिजनेस को **₹170 से ₹200 लाख करोड़** तक पहुंचाने का बड़ा लक्ष्य रखा है। जून 2026 तक बैंक का कुल बिजनेस **₹110.01 लाख करोड़** रहा है।
सरकारी क्षेत्र के दिग्गज बैंक, State Bank of India (SBI) ने भविष्य के लिए अपना विजन साफ कर दिया है। बैंक के चेयरमैन C S Setty ने पुष्टि की है कि बैंक अब अपनी डिजिटल क्षमताओं के दम पर तेजी से विस्तार करने की राह पर है। जून 2026 तक ₹110.01 लाख करोड़ का बिजनेस आंकड़ा छूने के बाद, बैंक अब ₹200 लाख करोड़ के जादुई आंकड़े की ओर देख रहा है।
बैंक पिछले फाइनेंशियल ईयर की दूसरी तिमाही में ही ₹100 लाख करोड़ का माइलस्टोन पार कर चुका है, जो इसकी मजबूत पकड़ को दर्शाता है। अब बैंक का फोकस केवल ट्रांजैक्शन तक सीमित नहीं, बल्कि अपने ग्राहकों के साथ गहरे और लंबे समय तक चलने वाले 'डेवलपमेंटल रिलेशन' बनाने पर है।
निवेशकों के लिए क्या हैं चुनौतियां?
इतने बड़े पैमाने पर विस्तार करना बिना जोखिम के नहीं है। निवेशकों को इन बातों पर गौर करना चाहिए:
- एसेट क्वालिटी: तेजी से बढ़ते लोन पोर्टफोलियो के साथ बैंक अपनी एसेट क्वालिटी को कैसे मेंटेन करता है, यह सबसे जरूरी होगा।
- मार्केट कॉम्पिटिशन: प्राइवेट और अन्य सरकारी बैंकों से मिल रही कड़ी टक्कर के बीच अपना मार्केट शेयर बचाए रखना बड़ी चुनौती है।
- डिजिटल रिस्क: बैंक अपनी पूरी बैंकिंग फ्रेमवर्क को डिजिटल-फर्स्ट बना रहा है। इसमें होने वाली ऑपरेशनल लागत और तकनीकी रिस्क पर नजर रखनी होगी।
ऐतिहासिक रूप से, SBI ने Yes Bank संकट के समय भी एक बड़े 'स्टेबलाइजिंग फोर्स' के रूप में काम किया है। निवेशकों के लिए आने वाले क्वार्टर में लोन बुक ग्रोथ, डिपॉजिट मोबिलाइजेशन और NPA (नॉन-परफॉर्मिंग एसेट) के आंकड़े अहम इंडिकेटर होंगे।
