SBI ने ICICI Bank को पछाड़ा! दमदार Q3 नतीजों से शेयर रॉकेट, मार्केट कैप में बड़ा उछाल

BANKINGFINANCE
Whalesbook Logo
AuthorKaran Malhotra|Published at:
SBI ने ICICI Bank को पछाड़ा! दमदार Q3 नतीजों से शेयर रॉकेट, मार्केट कैप में बड़ा उछाल
Overview

स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) के शेयर में आज जबरदस्त उछाल देखने को मिला है। दमदार दिसंबर तिमाही (Q3 FY26) के नतीजों के दम पर SBI का शेयर **6%** से ज्यादा चढ़कर अपने 52-हफ्ते के नए हाई पर पहुंच गया। इस शानदार परफॉरमेंस के चलते SBI का मार्केट कैपिटलाइजेशन (Market Cap) ICICI Bank से आगे निकल गया है, और अब यह वैल्यूएशन के लिहाज़ से भारत का दूसरा सबसे बड़ा लिस्टेड बैंक बन गया है।

वैल्यूएशन में हुआ बड़ा बदलाव

स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) के शेयर ने आज शुरुआती कारोबार में 6% से अधिक की छलांग लगाई और ₹1,136.85 के 52-हफ्ते के नए शिखर को छू लिया। इस तूफानी तेजी की मुख्य वजह बैंक के दिसंबर तिमाही के नतीजे रहे, जो बाजार की उम्मीदों से कहीं बेहतर थे। इन शानदार नतीजों के दम पर SBI का मार्केट कैप ₹10.46 लाख करोड़ हो गया, जिसने पब्लिक सेक्टर के इस दिग्गज बैंक को ICICI Bank से आगे कर दिया। ICICI Bank का मौजूदा मार्केट वैल्यूएशन ₹10.02 लाख करोड़ है। हालांकि, HDFC Bank अब भी ₹14.48 लाख करोड़ से ज्यादा के मार्केट कैप के साथ भारत का सबसे बड़ा बैंक बना हुआ है।

नतीजों के पीछे के मुख्य कारण

SBI का दिसंबर तिमाही (FY26) के लिए स्टैंडअलोन नेट प्रॉफिट (Net Profit) साल-दर-साल 24.5% बढ़कर ₹21,028 करोड़ पर पहुंच गया। इस ग्रोथ में बैंक की नेट इंटरेस्ट इनकम (NII) में 9% की बढ़ोतरी का बड़ा हाथ रहा, जो ₹45,190 करोड़ पर पहुंच गई। इससे पता चलता है कि बैंक के मुख्य लेंडिंग बिजनेस में लगातार बढ़त हो रही है। बैंक की एसेट क्वालिटी (Asset Quality) में भी सुधार देखा गया, जिसमें ग्रॉस नॉन-परफॉर्मिंग एसेट (NPA) रेशियो पिछले क्वार्टर के 1.73% से घटकर 1.57% पर आ गया। वहीं, नेट NPA रेशियो 0.42% से कम होकर 0.39% पर स्थिर हुआ। इस तिमाही में प्रोविजन्स (Provisions) घटकर ₹4,506 करोड़ रह गए, जो पिछले क्वार्टर और पिछले साल की इसी अवधि से काफी कम हैं। शुरुआती सौदों में 7 लाख से ज्यादा शेयरों का वॉल्यूम ट्रेड हुआ, जो पिछले दो हफ्तों के औसत से काफी ज्यादा है। बैंक ने अपने FY26 के लिए क्रेडिट ग्रोथ (Credit Growth) का अनुमान भी बढ़ाकर 13-15% कर दिया है, जो 12-14% था।

एनालिस्ट की नजर और सेक्टर का समीकरण

फिलहाल, SBI का शेयर प्राइस-टू-अर्निंग (P/E) रेशियो (TTM) लगभग 11.3 से 12.54 के बीच है, जो कि प्राइवेट सेक्टर के बैंकों की तुलना में काफी कम है। ICICI Bank का P/E रेशियो करीब 17.78 से 19.73 है, जबकि HDFC Bank का P/E 18.7 से 23.13 के बीच है। यह वैल्यूएशन अंतर बताता है कि बाजार शायद पब्लिक सेक्टर बैंक के लिए कुछ ज्यादा रिस्क या कम ग्रोथ की उम्मीद कर रहा है, भले ही हाल के नतीजे मजबूत रहे हों। पिछले छह महीनों और कैलेंडर ईयर 2026 में SBI ने HDFC Bank और ICICI Bank, दोनों को स्टॉक परफॉरमेंस के मामले में पीछे छोड़ा है।

भारतीय बैंकिंग सेक्टर में कुल डिपॉजिट ग्रोथ (Deposit Growth) लगभग 10% सालाना बनी हुई है। हालांकि, इसमें एक बड़ा स्ट्रक्चरल बदलाव आ रहा है - फिक्स्ड डिपॉजिट्स में घरों की भागीदारी घट रही है और कम लागत वाले करेंट अकाउंट सेविंग अकाउंट (CASA) डिपॉजिट्स का शेयर भी गिर रहा है। यह ट्रेंड लंबी अवधि में फंड की उपलब्धता और लागत को प्रभावित कर सकता है, जिससे बैंक महंगी बल्क और होलसेल डिपॉजिट्स पर ज्यादा निर्भर हो जाएंगे। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) द्वारा रेगुलेटरी उपायों जैसे कि कैश रिजर्व रेशियो (CRR) में फेज्ड कटौती और लिक्विडिटी बढ़ाने से कुछ सहारा मिल रहा है। वहीं, जनवरी 2026 से लागू हो रहे नए डिजिटल बैंकिंग लाइसेंसिंग नियमों से सभी बैंकों को तालमेल बिठाना होगा। Nuvama Institutional Equities, JM Financial और Emkay Global जैसी ब्रोकरेज फर्मों ने 'BUY' रेटिंग बरकरार रखी है और टारगेट प्राइस क्रमशः ₹1,250, ₹1,250 और ₹1,225 कर दिया है।

संभावित चुनौतियां (Bear Case)

अपनी मौजूदा वित्तीय मजबूती और मार्केट कैप में बढ़ोतरी के बावजूद, कुछ संभावित खतरे और पिछले गवर्नेंस के मुद्दे जांच के दायरे में हैं। मई 2025 में पूर्व SBI अधिकारियों, जिनमें पूर्व चेयरमैन दिनेश खारा और डीएमडी बिनोद मिश्रा शामिल थे, के खिलाफ वित्तीय कदाचार के आरोप सामने आए थे, जिन्होंने इंटरनल कंट्रोल और पारदर्शिता पर सवाल खड़े किए। इसके अलावा, SBI को सुप्रीम कोर्ट में चुनावी बॉन्ड डेटा के खुलासे को लेकर भी जांच का सामना करना पड़ा था, जो रेगुलेटरी निर्देशों का पालन करने में पिछली चुनौतियों को दर्शाता है। स्ट्रक्चरल रूप से, सेक्टर का महंगी बल्क डिपॉजिट्स पर बढ़ता भरोसा नेट इंटरेस्ट मार्जिन पर दबाव डाल सकता है। जनवरी 2026 से डिजिटल बैंकिंग के नए रेगुलेटरी फ्रेमवर्क के लिए परमिट और इंफ्रास्ट्रक्चर में बदलाव की आवश्यकता सभी खिलाड़ियों के लिए एक ऑपरेशनल चुनौती पेश करेगी। प्राइवेट बैंकों की तुलना में वैल्यूएशन में बड़ा अंतर, जो अपसाइड पोटेंशियल दिखाता है, यह भी बताता है कि बाजार शायद पब्लिक सेक्टर यूनिट्स के लिए उच्च रिस्क प्रीमियम या स्थायी स्ट्रक्चरल बाधाओं को ध्यान में रख रहा है।

भविष्य का दृष्टिकोण

बाजार का नजरिया अभी भी सकारात्मक बना हुआ है, और एनालिस्ट्स SBI के डाइवर्सिफाइड ग्रोथ ड्राइवर्स और मजबूत मार्जिन पर जोर दे रहे हैं। Nuvama Institutional Equities ने ₹1,250 का टारगेट प्राइस तय किया है और 'टॉप बाय' कॉल दोहराई है। यूनियन बजट 2026 में 'बैंकिंग फॉर विकसित भारत' पर एक हाई-लेवल कमेटी बनाने का प्रस्ताव है, जो बैंकिंग सेक्टर के सुधारों को भारत की ग्रोथ और टेक्नोलॉजी एडॉप्शन से जोड़ेगा। यह पहल, SBI के FY26 के लिए लोन ग्रोथ गाइडेंस को 13-15% तक बढ़ाने के साथ मिलकर, विकसित हो रहे वित्तीय परिदृश्य में लगातार विस्तार और अनुकूलन पर रणनीतिक फोकस का संकेत देती है।

Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.