मार्जिन दबाव और नतीजों का असर
State Bank of India (SBI) के शेयर में 4% की गिरावट आई, क्योंकि बैंक के मार्च तिमाही (Q4 FY26) के नतीजे उम्मीदों से काफी कम रहे। इसकी मुख्य वजह नेट इंटरेस्ट मार्जिन (NIMs) का 2.98% से घटकर 2.81% हो जाना और ट्रेजरी इनकम में आई कमी रही।
प्रॉफिट और ग्रोथ के आंकड़े
हालांकि, बैंक का नेट प्रॉफिट साल-दर-साल 5.6% बढ़कर ₹19,683.8 करोड़ रहा, लेकिन पिछली तिमाही की तुलना में इसमें 6.4% की गिरावट आई, जिसने निवेशकों को चिंतित किया। बैंक का मार्केट कैप फिलहाल करीब ₹9.03 ट्रिलियन है और शेयर ₹1019 के स्तर पर ट्रेड कर रहा है। यह शेयर की 52-सप्ताह की रेंज (₹755.50 से ₹1,234.70) के बीच है। अच्छी बात यह है कि लोन एडवांसेज़ में 17% की जोरदार साल-दर-साल ग्रोथ दर्ज की गई है।
वैल्यूएशन और सेक्टर की चुनौतियां
SBI का प्राइस-टू-अर्निंग्स (P/E) रेश्यो 10.3x से 12.9x के बीच है, जो ICICI Bank (15.6x-17.5x) और HDFC Bank (14.9x-16.1x) जैसे बड़े निजी बैंकों की तुलना में कम है। यह वैल्यूएशन ऐतिहासिक रूप से बैंक के लिए ज्यादा महंगा नहीं माना जा रहा है।
हालांकि, पूरा भारतीय बैंकिंग सेक्टर डिपॉजिट के लिए कड़े मुकाबले का सामना कर रहा है। इससे बैंकों की फंडिंग कॉस्ट बढ़ रही है और NIMs पर लगातार दबाव बना हुआ है।
आगे की राह और ब्रोकरेज की राय
SBI मैनेजमेंट का अनुमान है कि फाइनेंशियल ईयर 2027 (FY27) में क्रेडिट ग्रोथ 13% से 15% के बीच रहेगी। वहीं, Nuvama और Motilal Oswal जैसे ब्रोकरेज हाउस ने बैंक पर 'Buy' रेटिंग बरकरार रखते हुए टारगेट प्राइस क्रमशः ₹1,200 और ₹1,300 तय किया है।
जोखिम और रेगुलेटरी मुद्दे
NIMs पर लगातार दबाव, डिपॉजिट की बढ़ती लागत और यील्ड में नरमी बैंक के लिए बड़ी चुनौतियां हैं। एक रिपोर्ट के अनुसार, NIMs के जल्द सुधरने की उम्मीद कम है।
इसके अलावा, SBI को हाल ही में रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने लोन देने, ग्राहक सुरक्षा और करंट अकाउंट खोलने में गड़बड़ी को लेकर ₹1.73 करोड़ का जुर्माना भी लगाया है।
