State Bank of India (SBI) ने बैंकिंग सिस्टम में बढ़ती लिक्विडिटी का हवाला देते हुए अगले 3 महीनों तक डिपॉजिट रेट्स को स्थिर रखने का ऐलान किया है। RBI द्वारा रेपो रेट में **25 बेसिस पॉइंट्स** की बढ़ोतरी के बाद यह निर्णय काफी अहम माना जा रहा है।
ब्याज दरों पर SBI का रुख
SBI के चेयरमैन सी. एस. शेट्टी ने साफ कर दिया है कि बैंक फिलहाल अपनी डिपॉजिट इंटरेस्ट रेट्स में कोई बदलाव नहीं करेगा। बैंक का कहना है कि सिस्टम में अभी पर्याप्त लिक्विडिटी मौजूद है, जिसके चलते डिपॉजिट जुटाने के लिए तुरंत दरों को बढ़ाने की कोई जरूरत नहीं है। यह कदम 7 अक्टूबर, 2026 को रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) द्वारा रेपो रेट में की गई 25 बेसिस पॉइंट्स की बढ़ोतरी के तुरंत बाद आया है।
नेट इंटरेस्ट मार्जिन और लोन ग्रोथ
ब्याज दरों के इस उतार-चढ़ाव भरे माहौल में भी बैंक का मैनेजमेंट अपने फाइनेंशियल प्रदर्शन को लेकर काफी पॉजिटिव है। चेयरमैन का मानना है कि बैंक का नेट इंटरेस्ट मार्जिन (NIM) मजबूत बना रहेगा और अगले 2 से 3 क्वार्टर में इसमें बढ़ोतरी की संभावना है। चूंकि बैंक के लोन पोर्टफोलियो का एक बड़ा हिस्सा एक्सटर्नल बेंचमार्क से जुड़ा है, इसलिए एसेट रीप्राइसिंग का फायदा बैंक को जल्द मिलता है, जो प्रॉफिटेबिलिटी को सपोर्ट करता है।
SBI ने मौजूदा फाइनेंशियल ईयर के लिए क्रेडिट ग्रोथ का लक्ष्य 14% से 15% रखा है। इस ग्रोथ को हासिल करने के लिए बैंक डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन और फाइनेंशियल इंक्लूजन पर खासा जोर दे रहा है।
निवेशकों के लिए मार्केट अपडेट
8 अक्टूबर, 2026 को SBI का शेयर ₹948-₹949 के आसपास ट्रेड करता दिखा। बाजार में इस फैसले के बाद छोटी-मोटी हलचल देखी गई। हालांकि, निवेशकों की नजर अब RBI के लिक्विडिटी मैनेजमेंट पर है। अगर सिस्टम में लिक्विडिटी टाइट होती है, तो बैंकों को फंडिंग के लिए डिपॉजिट रेट्स बढ़ाने पड़ सकते हैं, जिसका असर मार्जिन्स पर पड़ सकता है। इसके अलावा, ग्लोबल क्रूड ऑयल की कीमतें और जियोपॉलिटिकल तनाव भी बैंकिंग सेक्टर के लिए बड़े ट्रिगर बने हुए हैं।
