State Bank of India ने Q2 FY27 के लिए **₹23,038 करोड़** का शानदार प्रॉफिट दर्ज किया है, जो सालाना आधार पर **14.28%** अधिक है। इसके बावजूद शेयर में दबाव दिखा, क्योंकि निवेशक बैंक की कमाई की क्वालिटी और ट्रेजरी घाटे को लेकर सतर्क हैं।
State Bank of India के Q2 FY27 नतीजे उम्मीदों के मुताबिक रहे, लेकिन बाजार का रिएक्शन कुछ और ही कहानी बयां कर रहा है। कंपनी का नेट प्रॉफिट 14.28% बढ़कर ₹23,038 करोड़ रहा, जबकि नेट इंटरेस्ट इनकम (NII) में 14.69% का उछाल देखा गया और यह ₹49,143 करोड़ पर पहुंच गई। बावजूद इसके, 3 नवंबर, 2026 को कारोबार के दौरान शेयर पर बिकवाली का दबाव बना रहा।
क्यों घबराए निवेशक?
नतीजों में आई यह तेजी बाजार को पूरी तरह प्रभावित नहीं कर पाई। जानकारों का मानना है कि मुनाफा बैंक की मुख्य ऑपरेशनल परफॉर्मेंस के बजाय सब्सिडियरी में हिस्सेदारी बेचने से मिले 'वन-टाइम गेन' के कारण ज्यादा बढ़ा है। साथ ही, बॉन्ड यील्ड में बदलाव के चलते बैंक के ट्रेजरी पोर्टफोलियो पर 'मार्क-टू-मार्केट' नुकसान का असर भी निवेशकों की चिंता बढ़ा रहा है।
ग्रोथ का प्लान और लिक्विडिटी
बैंक के चेयरमैन CS Setty ने 14-15% क्रेडिट ग्रोथ का भरोसा बरकरार रखा है। बैंक के पास ₹3.5 से ₹4 लाख करोड़ का भारी लिक्विडिटी बफर मौजूद है, जो कॉर्पोरेट और MSME सेक्टर में कर्ज की मांग पूरी करने के लिए काफी है।
टैक्स पॉलिसी पर SBI का स्टैंड
फॉरेन इन्वेस्टमेंट में हो रही गिरावट के बीच SBI Research ने सरकार को LTCG टैक्स में बदलाव का सुझाव दिया है। बैंक ने छूट की सीमा को ₹2 लाख तक बढ़ाने की बात कही है, ताकि बाजार में विदेशी निवेश का बहाव स्थिर बना रहे।
आगे की चुनौतियां
शेयरधारकों के लिए अब दो बड़े फैक्टर महत्वपूर्ण हैं: 3.11% पर पहुंची नेट इंटरेस्ट मार्जिन (NIM) को मेंटेन रखना और भविष्य में आने वाला 'एक्सपेक्टेड क्रेडिट लॉस' (ECL) फ्रेमवर्क। ये दोनों ही चीजें बैंक की भविष्य की बैलेंस शीट और कैपिटल प्रोविजनिंग को सीधे प्रभावित करेंगी।
