भारतीय स्टेट बैंक (SBI) के शेयरों में आज यानी सोमवार को बिकवाली हावी रही। पिछले हफ्ते दमदार Q1 FY27 नतीजों के बाद आई तेजी के बाद, सोमवार को स्टॉक में गिरावट दर्ज की गई। कंपनी का नेट प्रॉफिट साल-दर-साल **10.23%** बढ़कर **₹21,121 करोड़** रहा और एसेट क्वालिटी में भी सुधार देखने को मिला। पिछले सत्र में **4%** की तेजी के बाद, निवेशकों ने मुनाफावसूली की।
Q1 में SBI का दमदार प्रदर्शन
SBI ने शुक्रवार को अपने Q1 FY27 के नतीजे जारी किए, जिसमें स्टैंडअलोन नेट प्रॉफिट में 10.23% का सालाना उछाल देखा गया, जो ₹21,121 करोड़ रहा। बैंक का नेट इंटरेस्ट इनकम (NII) भी 14.88% बढ़कर ₹46,992 करोड़ तक पहुँच गया। यह नतीजे बाजार की उम्मीदों से बेहतर थे, जिससे फाइनेंशियल ईयर की एक मजबूत शुरुआत हुई।
एसेट क्वालिटी में बड़ा सुधार
बैंक की एसेट क्वालिटी में भी शानदार सुधार हुआ है। ग्रॉस नॉन-परफॉर्मिंग एसेट (NPA) रेशियो घटकर 1.47% पर आ गया है, जो पिछले दो दशकों में सबसे अच्छा स्तर है। इस मजबूती को देखते हुए, बैंक के मैनेजमेंट ने पूरे साल के लिए क्रेडिट ग्रोथ का अनुमान बढ़ाकर 14-15% कर दिया है।
जमा लागत पर निवेशकों की नजर
नतीजों के बाद आई गिरावट के बावजूद, ज्यादातर एनालिस्ट SBI पर अभी भी बुलिश हैं। कई ब्रोकरेज फर्मों ने बैंक के मजबूत कोर ऑपरेशंस का हवाला देते हुए पॉजिटिव रेटिंग बरकरार रखी है।
हालांकि, बाजार जोखिमों को नजरअंदाज नहीं कर रहा है। फिलहाल निवेशकों का ध्यान बैंकिंग सेक्टर में जमा राशि (Deposits) जुटाने की चुनौती पर है। इंडस्ट्री में डिपॉजिट्स को आकर्षित करने की प्रतिस्पर्धा तेज है, जिससे बैंकों के लिए लागत बढ़ सकती है।
जमा लागत पर किसी भी तरह का दबाव नेट इंटरेस्ट मार्जिन (NIM) को प्रभावित कर सकता है, जो बैंकिंग प्रॉफिटेबिलिटी का एक महत्वपूर्ण पैमाना है। SBI ने भले ही अपना डोमेस्टिक NIM 3% पर बनाए रखने में लचीलापन दिखाया हो, लेकिन आने वाली तिमाहियों में इस ट्रेंड को बनाए रखने की क्षमता पर शेयरधारकों की खास नजर रहेगी। एनालिस्ट इस बात पर भी गौर कर रहे हैं कि बैंक आक्रामक क्रेडिट ग्रोथ लक्ष्य को लिक्विडिटी और डिपॉजिट लागत के प्रबंधन के साथ कैसे संतुलित करता है। जैसे-जैसे बैंकिंग उद्योग इन मैक्रो-लेवल चुनौतियों से निपट रहा है, निवेशक मैनेजमेंट से यह जानने की कोशिश करेंगे कि मौजूदा प्रदर्शन को प्रॉफिट मार्जिन से समझौता किए बिना कैसे बनाए रखा जाए। फिलहाल की अस्थिरता नतीजों के बाद आई तेजी के बाद एक करेक्शन नजर आ रही है, न कि बैंक के आउटलुक में किसी बड़े बदलाव का संकेत।
