भारतीय स्टेट बैंक (SBI) के शेयरों में बुधवार को **2%** की गिरावट देखी गई। मार्च तिमाही के नतीजे आने के बाद निवेशकों की सेंटिमेंट पर असर पड़ा, जिसमें नेट प्रॉफिट में पिछली तिमाही के मुकाबले कमी आई है।
Detailed Coverage
तिमाही नतीजों का असर
सरकारी बैंक स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) के शेयरों में आज इंट्रा-डे ट्रेडिंग के दौरान 2% की गिरावट आई और भाव ₹1,023.50 पर पहुंच गया। यह गिरावट बैंक के 2026 के मार्च तिमाही के वित्तीय नतीजों के बाद आई है, जिसमें पिछली तिमाही की तुलना में बैंक के नेट प्रॉफिट में कमी देखने को मिली है।
तिमाही और सालाना प्रदर्शन
मार्च 2026 तिमाही के लिए, बैंक ने ₹20,161 करोड़ का कंसॉलिडेटेड नेट प्रॉफिट दर्ज किया, जो कि दिसंबर 2025 की तिमाही में ₹21,876 करोड़ था। हालांकि, रेवेन्यू में मामूली बढ़त देखी गई, जो पिछली तिमाही के ₹130,589 करोड़ से बढ़कर ₹131,080 करोड़ हो गया।
तिमाही नतीजों में नरमी के बावजूद, सालाना आधार पर SBI का प्रदर्शन मजबूत रहा। पूरे वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए, बैंक ने ₹514,932 करोड़ का रेवेन्यू दर्ज किया, जो पिछले साल की तुलना में 4.89% अधिक है। वहीं, पूरे वित्तीय वर्ष के लिए नेट प्रॉफिट 7.78% बढ़कर ₹85,203 करोड़ हो गया।
एसेट क्वालिटी और बैलेंस शीट
कमाई के अलावा, बैंक की एसेट क्वालिटी में भी सुधार दिखा है। मार्च 2026 तक ग्रॉस नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स (NPA) घटकर 1.49% रह गए, जो मार्च 2025 में 1.82% थे। नेट NPA भी इसी अवधि में 0.47% से घटकर 0.39% हो गया। यह दर्शाता है कि बैंक अपने लोन पोर्टफोलियो को मैनेज करने में सफल रहा है। बैंक के कुल एसेट्स बढ़कर ₹8,321,568 करोड़ और कुल डिपॉजिट ₹6,043,097 करोड़ तक पहुंच गए।
आगे क्या?
निवेशक अब सालाना ग्रोथ को तिमाही मार्जिन पर पड़ रहे दबाव से तौल रहे हैं। बैंक का कैपिटल एडिक्वेसी रेशियो (CAR) 15% पर बना हुआ है। ऑपरेटिंग कैश फ्लो में गिरावट आई है, लेकिन नेट कैश फ्लो में सुधार हुआ है। बाजार की नजरें अब SBI Funds Management Limited के संभावित इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग (IPO) पर भी टिकी हैं। एनालिस्ट्स आने वाली तिमाहियों में लोन ग्रोथ और मार्जिन ट्रेंड्स पर मैनेजमेंट की कमेंट्री का इंतजार करेंगे।
