State Bank of India ने ग्रामीण महिला उद्यमियों को सशक्त बनाने के लिए International Finance Corporation के साथ **$15 करोड़** के सोशल लोन का करार किया है।
देश के सबसे बड़े लेंडर State Bank of India ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था में सुधार और महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए बड़ा कदम उठाया है। बैंक ने World Bank Group की इकाई International Finance Corporation (IFC) से $15 करोड़ का सोशल लोन हासिल किया है। इस राशि का मुख्य उद्देश्य महिला-नेतृत्व वाले सेल्फ-हेल्प ग्रुप्स (SHGs) और 'स्वयं सिद्धा स्कीम' से जुड़ी महिलाओं को आसान क्रेडिट मुहैया कराना है।\n\n### फंड का इस्तेमाल और इम्पैक्ट\nयह फंड ग्रामीण इलाकों में खेती, पशुपालन, मछली पालन और फूड प्रोसेसिंग जैसे क्षेत्रों में निवेश किया जाएगा। बैंक की योजना इस लोन के जरिए लगभग 8,64,000 ग्रामीण महिलाओं तक वित्तीय मदद पहुँचाने की है। निवेशकों के लिए यह संकेत है कि SBI अपने रूरल क्रेडिट पोर्टफोलियो को और मजबूत कर रहा है, जो सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के लिए ग्रोथ का एक बड़ा जरिया है।\n\n### रिस्क मैनेजमेंट पर बैंक का नया कदम\nसोशल लोन के अलावा, SBI ने IFC के साथ ISDA Master Agreement भी साइन किया है। इसके तहत SBI भारत और दक्षिण एशिया में IFC का पहला डोमेस्टिक स्वैप काउंटरपार्टी बन गया है। सरल भाषा में कहें तो, यह पार्टनरशिप बैंक को करेंसी फ्लक्चुएशन (मुद्रा के उतार-चढ़ाव) से होने वाले रिस्क को बेहतर तरीके से मैनेज करने में मदद करेगी। इससे बैंक अपने लॉन्ग-टर्म उधार और लोन ऑपरेशंस को फॉरेन एक्सचेंज रिस्क से सुरक्षित रख सकेगा।\n\n### निवेशकों को क्या देखना चाहिए?\nहालांकि यह खबर वित्तीय समावेश (financial inclusion) के नजरिए से बहुत सकारात्मक है, लेकिन निवेशकों को इसके एग्जीक्यूशन पर नजर रखनी होगी। ग्रामीण स्तर पर छोटे स्तर के उद्यमों को लोन देना काफी ऑपरेशनल मेहनत मांगता है और कॉर्पोरेट लोन के मुकाबले इसमें क्रेडिट रिस्क अलग होता है। बैंक आने वाली तिमाहियों में इन छोटे कर्जदारों की एसेट क्वालिटी को कैसे मैनेज करता है, यह प्रदर्शन के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण होगा।
