SBI का डिजिटल दम: YONO से बढ़ी Efficiency, लेकिन डिपॉजिट जुटाने में बढ़ रही चुनौती

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
SBI का डिजिटल दम: YONO से बढ़ी Efficiency, लेकिन डिपॉजिट जुटाने में बढ़ रही चुनौती

SBI ने डिजिटल बैंकिंग में बड़ी सफलता हासिल की है। बैंक के **11 करोड़** से अधिक YONO यूजर्स हैं, जिससे बैंक की ऑपरेशनल एफिशिएंसी जबरदस्त तरीके से बढ़ी है। हालांकि, रिटेल निवेशकों का पैसा म्यूचुअल फंड और अन्य मार्केट इंस्ट्रूमेंट्स की ओर शिफ्ट होने से बैंक के सामने डिपॉजिट जुटाने की नई चुनौती खड़ी हो गई है।

डिजिटल क्रांति और ऑपरेशनल एफिशिएंसी

SBI के चेयरमैन सी.एस. सेट्टी ने हाल ही में फॉर्च्यून बैंकिंग समिट में जानकारी दी कि बैंक ने 2017 के बाद से अपनी बैलेंस शीट को दोगुना कर लिया है, वह भी बिना किसी अतिरिक्त मैनपावर या नई शाखाओं के। इस कमाल के पीछे बैंक का YONO ऐप है, जिस पर रोजाना 3 करोड़ से ज्यादा लॉगिन होते हैं और 74% नई फिक्स्ड डिपॉजिट इसी प्लेटफॉर्म के जरिए की जाती है।

बैंक का डिजिटल ट्रांजेक्शन इतना बढ़ चुका है कि अब 97% से 98% बैंकिंग कामकाज ब्रांच के बाहर ही हो रहे हैं। बैंक रोजाना 30 करोड़ UPI ट्रांजेक्शन प्रोसेस कर रहा है।

डिपॉजिट की बदलती जंग

डिजिटल सफलता के बीच एक बड़ा रिस्क भी उभर रहा है। चेयरमैन सेट्टी ने स्वीकार किया कि भारतीय परिवारों की बचत अब ट्रेडिशनल बैंक डिपॉजिट (CASA) के बजाय म्यूचुअल फंड, इंश्योरेंस और कैपिटल मार्केट की तरफ तेजी से शिफ्ट हो रही है। इस वजह से SBI समेत अन्य बैंकों को डिपॉजिट बरकरार रखने के लिए ऊंचे ब्याज दर देने पड़ सकते हैं, जिसका असर उनके नेट इंटरेस्ट मार्जिन (NIMs) पर दिख सकता है।

लैंडिंग स्ट्रेटजी में बदलाव

SBI ने अब रिस्क कम करने के लिए बड़े कॉर्पोरेट लोन के बजाय रिटेल और MSME सेक्टर पर ध्यान केंद्रित किया है। डेटा-ड्रिवन क्रेडिट असेसमेंट टूल्स की मदद से बैंक अब तेजी से लोन बांट रहा है। हालांकि, निवेशकों की नजर अब इस बात पर टिकी रहेगी कि बैंक कैसे अपनी लोन ग्रोथ और डिपॉजिट जुटाने के बढ़ते कॉम्पिटिशन के बीच बैलेंस बनाता है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.