State Bank of India और उसकी सहायक कंपनी SBI Capital Markets ने NSE के आने वाले मेगा IPO के लिए अपनी हिस्सेदारी बेचने की योजना में बदलाव किया है। दोनों मिलकर **1%** हिस्सेदारी बेचेंगे, जिसके चलते SEBI की मंजूरी की प्रक्रिया में थोड़ी देरी हुई है।
हिस्सेदारी में बदलाव और SEBI की समीक्षा
NSE के मच अवेटेड IPO की तैयारी के बीच SBI ग्रुप ने अपनी रणनीति में तकनीकी बदलाव किया है। बैंक और उसकी आर्म SBICAPS मिलकर कुल 1% हिस्सा बेचेंगे। रिवाइज्ड स्ट्रक्चर के तहत, कुल 2.47 करोड़ (24.75 million) शेयर ऑफर किए जाएंगे। इसमें से 1.59 करोड़ शेयर SBI द्वारा और 87.8 लाख शेयर SBICAPS की ओर से बेचे जाएंगे। इस बदलाव के बाद अब SEBI नए डॉक्युमेंट्स की समीक्षा कर रहा है, जिससे फाइनल अप्रूवल में कुछ समय लग सकता है।
बैंक की रणनीति और चेयरमैन का रुख
चेयरमैन C.S. Setty ने स्पष्ट किया है कि यह केवल NSE के अवसर को देखते हुए लिया गया एक रणनीतिक फैसला है। फिलहाल बैंक की अन्य सहायक कंपनियों में हिस्सेदारी बेचने की कोई योजना नहीं है। बैंक अपने नॉन-कोर एसेट्स का मोनेटाइजेशन कर अपनी कैपिटल को बेहतर तरीके से एलोकेट कर रहा है।
होम लोन पोर्टफोलियो में रिकॉर्ड बढ़त
एक तरफ जहां IPO की चर्चा है, वहीं बैंक अपने मुख्य बिजनेस पर भी फोकस कर रहा है। SBI का होम लोन पोर्टफोलियो इस तिमाही में ₹10 ट्रिलियन का आंकड़ा पार करने की राह पर है। बैंक का होम लोन मार्केट में 28% का बड़ा दबदबा है, जो बैंक की मजबूती का बड़ा संकेत है।
निवेशकों के लिए अहम बातें
यह IPO 'ऑफर फॉर सेल' (OFS) रूट से आ रहा है, इसलिए लिस्टिंग के समय मार्केट का सेंटीमेंट और इंस्टीट्यूशनल डिमांड ही इसकी अंतिम वैल्यूएशन तय करेंगे। निवेशकों को ध्यान रखना चाहिए कि हाउसिंग सेक्टर में बड़ी एक्सपोजर के कारण बैंक पर कंस्ट्रक्शन साइकिल का असर भी पड़ सकता है।
