बढ़ती महंगाई और हाई एनर्जी कॉस्ट पर लगाम लगाने के लिए RBI दिसंबर में Repo Rate में **50 बेसिस पॉइंट्स** की बढ़ोतरी कर सकता है। SBI Research की इस रिपोर्ट ने निवेशकों और कर्जदारों की चिंता बढ़ा दी है।
दिसंबर की 2 से 4 तारीख को होने वाली RBI की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी की मीटिंग पर सबकी निगाहें हैं। अर्थव्यवस्था में महंगाई की जड़ें गहरी होती जा रही हैं, जिसे देखते हुए SBI Research ने यह बड़ा अनुमान लगाया है। \n\nमहंगाई का दायरा लगातार बढ़ रहा है। सितंबर में 75% कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (CPI) में योगदान देने वाली कमोडिटीज की संख्या बढ़कर 31 हो गई है, जो अगस्त में 25 थी। इसका मतलब है कि महंगाई सिर्फ सप्लाई चेन तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरी अर्थव्यवस्था में फैल चुकी है। \n\n### RBI के पास क्या हैं विकल्प? \n\nSBI Research के अनुसार, RBI के सामने दो रास्ते हैं: \n1. सीधे 50 बेसिस पॉइंट्स की बढ़ोतरी, जिससे Repo Rate 6% पर पहुंच जाएगा। \n2. 25 बेसिस पॉइंट्स की बढ़ोतरी के साथ लिक्विडिटी एडजस्टमेंट फैसिलिटी (LAF) के कॉरिडोर को और चौड़ा करना। इस स्थिति में मार्जिनल स्टैंडिंग फैसिलिटी (6.25%) और स्टैंडिंग डिपॉजिट फैसिलिटी (5.50%) पर असर दिख सकता है। \n\n### निवेशकों के लिए क्या हैं मायने? \n\nब्याज दरों में इजाफे का असर अलग-अलग सेक्टर पर अलग दिखेगा: \n* बैंकिंग: शुरुआती दौर में मार्जिन सुधर सकते हैं, लेकिन लोन डिफॉल्ट का रिस्क बढ़ सकता है। \n* इंटरेस्ट-सेंसिटिव सेक्टर: रीयल एस्टेट, ऑटोमोबाइल और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स पर सीधा दबाव पड़ेगा, क्योंकि होम लोन और व्हीकल फाइनेंसिंग महंगी हो जाएगी। \n\nइसके अलावा, ब्रेंट क्रूड की कीमतें USD 110 प्रति बैरल के आसपास बने रहने की आशंका है, जिससे देश के इंपोर्ट बिल पर दबाव रहेगा और RBI के लिए राहत देना मुश्किल हो सकता है। अब देखना यह है कि क्या RBI ग्रोथ को सपोर्ट करता है या फिर महंगाई से लड़ने के लिए कड़ा रुख अपनाता है।
