SBI Research की नई रिपोर्ट के मुताबिक, हालिया **$127 बिलियन** के FCNR(B) डिपॉजिट इनफ्लो से बैंकों और RBI को **₹5.5 लाख करोड़** का बड़ा फायदा हो सकता है। यह लिक्विडिटी बाजार में **₹25 लाख करोड़** तक का नया क्रेडिट सपोर्ट कर सकती है।
बैंकों की कमाई और क्रेडिट का गणित
SBI Research की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, भारी मात्रा में आए ये डिपॉजिट बैंकों के लिए फंड जुटाने का एक बड़ा जरिया बन गए हैं। इस अतिरिक्त लिक्विडिटी से बैंकों को ₹25 लाख करोड़ तक का नया लोन बांटने में मदद मिलेगी। अगर बैंक इन फंड्स को 7.5% की यील्ड पर लैंड करते हैं, तो सालाना नेट इंटरेस्ट इनकम में ₹1 लाख करोड़ का इजाफा हो सकता है। पांच साल की अवधि में यह बैंकिंग सेक्टर के लिए कुल ₹5 लाख करोड़ का बड़ा मुनाफा साबित हो सकता है।
रिजर्व बैंक (RBI) की क्या भूमिका है?
रिपोर्ट के मुताबिक, RBI के पास आए $100 बिलियन के निवेश पर 4% सालाना रिटर्न मिलने की उम्मीद है। हेजिंग कॉस्ट को घटाने के बाद, केंद्रीय बैंक को अगले पांच सालों में लगभग ₹50,000 करोड़ का नेट मुनाफा हो सकता है।
करेंसी हेजिंग से मिला सुरक्षा कवच
बाजार में अक्सर करेंसी रिस्क को लेकर डर बना रहता है, लेकिन FCNR(B) डिपॉजिट आमतौर पर RBI के स्वैप मैकेनिज्म (Swap Mechanism) के जरिए हेज किए जाते हैं। इससे रुपये में आने वाली गिरावट से बैंक सीधे तौर पर सुरक्षित रहते हैं और नुकसान का रिस्क खत्म हो जाता है।
निवेशकों को क्या देखना चाहिए?
हालांकि यह आंकड़े बहुत आशावादी दिख रहे हैं, लेकिन असली फायदा इस बात पर निर्भर करेगा कि देश में लोन की डिमांड कितनी रहती है। निवेशकों को आने वाले समय में 'क्रेडिट ऑफ-टेक' डेटा पर नजर रखनी चाहिए, क्योंकि ₹25 लाख करोड़ का क्रेडिट तभी संभव है जब बाजार में लोन लेने वाले लोग और कंपनियां मौजूद हों। इसके अलावा, ग्लोबल मार्केट और ब्याज दरों में बदलाव भी इन अनुमानों को प्रभावित कर सकते हैं।
