SBI के आने वाले Q4 FY26 के नतीजे 8 मई 2026 को जारी होंगे, जिनमें बैंक के इन्वेस्टमेंट पोर्टफोलियो (Investment Portfolio) पर अस्थायी असर और कोर बैंकिंग बिजनेस (Core Banking Business) की मजबूती के बीच एक बड़ा अंतर देखने को मिल सकता है। इन्वेस्टर्स ट्रेजरी इनकम (Treasury Income) में संभावित गिरावट को नजरअंदाज कर यह आंकने की कोशिश करेंगे कि बैंक बढ़ती लागतों के बीच अपने प्रॉफिट मार्जिन (Profit Margin) को कितनी अच्छी तरह संभाल पाता है और लोन ग्रोथ (Loan Growth) को बनाए रख पाता है।
एनालिस्ट्स (Analysts) का मानना है कि SBI के Q4 FY26 के मुनाफे पर सरकारी सिक्योरिटीज (Government Securities) पर बढ़ी यील्ड (Yield) के कारण ट्रेजरी इनकम (Treasury Income) में भारी कमी का असर पड़ेगा। इससे नए बॉन्ड का मूल्य तो बढ़ता है, लेकिन बैंक के पोर्टफोलियो में मौजूद पुराने बॉन्ड का मार्केट वैल्यू कम हो जाता है। नतीजों को लेकर अलग-अलग राय हैं, कुछ को मुनाफे में गिरावट की उम्मीद है तो कुछ को बढ़ोतरी की, लेकिन ट्रेजरी इंपैक्ट (Treasury Impact) एक अहम फैक्टर है। Nomura ने 11% की तिमाही आधार पर मुनाफे में गिरावट का अनुमान लगाया है, वहीं Kotak Institutional Equities ने 22% की गिरावट का फोरकास्ट (Forecast) किया है। SBI का शेयर हाल के दिनों में ₹1,059.90 और ₹1,078 के बीच कारोबार कर रहा है, जो कि इसके 52-हफ्ते की रेंज में है। भले ही हाल ही में NIFTY Bank इंडेक्स में तेजी आई हो, लेकिन 5 मई 2026 को समाप्त हुए हफ्ते में SBI के शेयर में 3.9% की गिरावट दर्ज की गई।
ट्रेजरी इंपैक्ट (Treasury Impact) से परे, डिपॉजिट्स (Deposits) के लिए बढ़ती लागत एक बड़ा कंसर्न (Concern) है, जो बैंक के नेट इंटरेस्ट मार्जिन (Net Interest Margins - NIMs) को दबा सकती है, भले ही लोन एक्सपेंशन (Loan Expansion) मजबूत बना रहे। इन चुनौतियों के बावजूद, SBI के कोर बैंकिंग ऑपरेशंस (Core Banking Operations) में मजबूती दिखने की उम्मीद है। नेट इंटरेस्ट इनकम (Net Interest Income - NII) में 9% सालाना के आसपास बढ़ोतरी का अनुमान है, जो 14% से 17% तक के मजबूत लोन ग्रोथ अनुमानों से प्रेरित है। पिछली तिमाही (Q3 FY26) में SBI ने 15.14% का लोन ग्रोथ और 9.02% का डिपॉजिट ग्रोथ दर्ज किया था। यह लोन एक्सपेंशन डिपॉजिट ग्रोथ से ज्यादा था, एक ऐसा फैक्टर जिसके लिए NIMs का सावधानीपूर्वक प्रबंधन करना होगा। तुलना के लिए, HDFC Bank ने इसी अवधि में लगभग 11.9% का लोन ग्रोथ और 11.6% का डिपॉजिट ग्रोथ देखा था। SBI का वैल्यूएशन, इसके प्राइस-टू-अर्निंग्स (Price-to-Earnings - P/E) रेशियो के आधार पर, जो लगभग 10.8x से 12.3x है, पब्लिक सेक्टर बैंक (PSU Bank) के औसत के अनुरूप है, लेकिन HDFC Bank जैसे प्राइवेट बैंक (Private Bank) के मुकाबले कम है, जिनका P/E 21.29x है। इससे पता चलता है कि निवेशक SBI को कुछ प्राइवेट लेंडर्स (Private Lenders) की तुलना में अधिक सावधानी से वैल्यू करते हैं। हालांकि पब्लिक सेक्टर बैंकों में आमतौर पर NIMs 2.7% से 3% के बीच होते हैं, जो प्राइवेट बैंकों से कम हैं, पर सभी मार्जिन प्रेशर का सामना कर रहे हैं। SBI का Q3 FY26 NIM 3.12% था। बैंक के प्राइस-टू-बुक (Price-to-Book - P/B) मल्टीपल (Multiple) में भी बढ़ोतरी हुई है और यह लगभग 2.41x पर पहुंच गया है, जिससे प्राइवेट बैंकों के साथ का अंतर कम हुआ है।
ट्रेजरी इंपैक्ट (Treasury Impact) के अलावा, SBI के नेट इंटरेस्ट मार्जिन (Net Interest Margins - NIMs) पर लगातार बना दबाव एक ज्यादा गंभीर चिंता का विषय है। कस्टमर डिपॉजिट्स (Customer Deposits) के लिए कॉम्पिटिशन (Competition) बढ़ रहा है, जिससे फंडिंग कॉस्ट (Funding Cost) बढ़ रही है। Fitch का अनुमान है कि भारतीय बैंकों के लिए औसत NIMs FY26 में लगभग 10 बेसिस पॉइंट्स (Basis Points) तक घट सकते हैं। हालांकि नए लोन से थोड़ी ज्यादा यील्ड मिल सकती है, लेकिन मौजूदा लोन की दरें ज्यादातर फिक्स्ड (Fixed) हैं, जिससे तत्काल कोई मदद नहीं मिल रही है। SBI के लोन और डिपॉजिट ग्रोथ के बीच का अंतर भी फंडिंग कॉस्ट पर दबाव डालता है। एक साल पहले, SBI के Q4 FY25 के नेट प्रॉफिट में 10% की गिरावट आई थी और NIMs 32 बेसिस पॉइंट्स गिर गए थे, जिसके कारण इसके शेयर प्राइस में भी गिरावट आई थी। यह दिखाता है कि निवेशक घटते मार्जिन पर नेगेटिव रिएक्शन देते हैं। अलग से, SBI पर लगभग ₹27.42 लाख करोड़ की बड़ी कंटिंजेंट लायबिलिटीज़ (Contingent Liabilities) हैं। पूर्व वरिष्ठ अधिकारियों से जुड़े वित्तीय कदाचार के आरोप और CSR फंड के दुरुपयोग जैसे मुद्दे गवर्नेंस रिस्क (Governance Risks) पेश करते हैं। एक ऐसा मामला जिसमें SBI मैनेजर पर ₹2.78 करोड़ से अधिक की गबन का आरोप लगा था, वह संभावित आंतरिक नियंत्रण कमजोरियों की ओर भी इशारा करता है। एक मजबूत रैली के बावजूद, यदि मार्जिन का दबाव जारी रहता है, तो SBI का P/E वैल्यूएशन महंगा हो सकता है, खासकर यह देखते हुए कि सामान्य इंडस्ट्री P/E कुछ अनुमानों से कम है।
आगे देखते हुए, निवेशक FY26 के लिए बोर्ड के डिविडेंड (Dividend) के फैसले पर नजर रखेंगे, जो स्टॉक को और बढ़ा सकता है। 8 मई 2026 को होने वाली एनालिस्ट कॉल (Analyst Call) में मैनेजमेंट की टिप्पणियां महत्वपूर्ण होंगी। मुख्य बिंदु यह होंगे कि बदलती ब्याज दरों के बीच NIMs के लिए अपेक्षित रास्ता क्या है, डिपॉजिट्स को आकर्षित करने के लिए बैंक की योजनाएं क्या हैं, और लोन डिफॉल्ट्स (Loan Defaults) व एसेट क्वालिटी (Asset Quality) पर क्या आउटलुक (Outlook) है। एनालिस्ट्स का नजरिया आम तौर पर सकारात्मक है, जिसमें कई 'Buy' या 'Strong Buy' रेटिंग्स की सलाह देते हैं और औसत 12-महीने के प्राइस टारगेट (Price Targets) 13-20% तक के संभावित अपसाइड (Upside) का संकेत देते हैं। हालांकि, SBI की भविष्य की अर्निंग ग्रोथ (Earnings Growth) उसके मजबूत लोन ग्रोथ और अच्छी एसेट क्वालिटी को बनाए रखते हुए मार्जिन प्रेशर को मैनेज करने में उसकी सफलता पर निर्भर करेगी।
