नतीजों के बावजूद बाज़ार में गिरावट, एनालिस्ट्स का भरोसा कायम
State Bank of India (SBI) के चौथी तिमाही के वित्तीय नतीजे आज घोषित हुए, जिसमें नेट प्रॉफिट ₹18,897 करोड़ रहने का अनुमान है। इन नतीजों के बावजूद, शेयर बाज़ार में इस पर दबाव साफ दिख रहा है और यह Nifty Bank इंडेक्स के मुकाबले पिछड़ रहा है। यानी, भले ही बाज़ार के अधिकांश एनालिस्ट्स (48 में से 42) इसे 'Buy' करने की सलाह दे रहे हैं और आने वाले समय के लिए लक्ष्य (target price) ₹1,300 तक दे रहे हैं, बाज़ार की चाल फिलहाल सतर्क है।
क्या कहते हैं नतीजे?
एनालिस्ट्स का अनुमान है कि SBI का नेट प्रॉफिट चौथी तिमाही में 1.4% बढ़कर करीब ₹18,897 करोड़ तक पहुंच सकता है। वहीं, नेट इंटरेस्ट इनकम (NII) में 9.3% की बढ़त के साथ यह ₹46,475 करोड़ रहने का अनुमान है। बैंक के नेट इंटरेस्ट मार्जिन (NIM) लगभग 3.02% रहने की उम्मीद है, जबकि ग्रॉस नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स (GNPA) 1.49% और नेट नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स (NNPA) 0.35% पर स्थिर रहने की संभावना है।
अलग-अलग राय और 'ट्रेजरी' का खेल
कुछ ब्रोकरेज फर्म्स जैसे Mirae Asset और Nuvama Institutional Equities ने तो नेट प्रॉफिट ₹20,090 करोड़ से ₹20,116.4 करोड़ तक रहने का अनुमान लगाया है। लेकिन Nomura जैसी फर्मों का अनुमान है कि मुनाफा सपाट रहेगा। कुछ रिपोर्ट्स तो यहाँ तक कह रही हैं कि सरकारी सिक्योरिटीज (government securities) में बढ़ते यील्ड (yield) के कारण हुए नुकसान के चलते नेट प्रॉफिट में 12% तक की गिरावट भी आ सकती है। यह दिखाता है कि बैंक के कोर बैंकिंग ऑपरेशंस के अलावा, ट्रेजरी परफॉर्मेंस (treasury performance) नतीजों पर बड़ा असर डाल सकती है।
शेयर क्यों है सुस्त?
नतीजों के बाद SBI का शेयर थोड़ा नीचे ट्रेड कर रहा है और पिछले पांच सेशन में यह 2.42% गिर चुका है। मार्केट में लिक्विडिटी (liquidity) की कमी और डिपॉजिट्स (deposits) के लिए बढ़ती प्रतिस्पर्धा को लेकर चिंताएं हैं, जो बैंकिंग सेक्टर पर दबाव बना रही हैं। Nifty Bank इंडेक्स भी आज करीब 0.8% नीचे रहा।
वैल्यू स्टॉक या प्राइवेट बैंक का पलड़ा भारी?
SBI का करेंट पी/ई रेश्यो (P/E ratio) लगभग 10.7-11.8 के आसपास है, जो इसे HDFC Bank जैसे प्राइवेट बैंकों (जिनका P/E 15.8-16.15 है) की तुलना में एक वैल्यू स्टॉक (value stock) बनाता है। हालांकि, कुछ बड़े इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (institutional investors) प्राइवेट बैंकों को ज़्यादा पसंद कर रहे हैं, जो मैक्रोइकॉनोमिक स्ट्रेस (macroeconomic stress) में बेहतर स्थिति में माने जा रहे हैं।
जोखिम और आगे की राह
बाजार में भू-राजनीतिक तनाव (geopolitical tensions) और विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) के लगातार आउटफ्लो (outflow) से भी अनिश्चितता बनी हुई है। रेटिंग एजेंसी Fitch Ratings का मानना है कि भारतीय बैंकों के मार्जिन में 20-30 बेसिस पॉइंट की कमी आ सकती है।
इसके बावजूद, एनालिस्ट्स का मानना है कि SBI फाइनेंशियल ईयर 2026 (FY26) में 13-15% की मजबूत लोन ग्रोथ (loan growth) हासिल करेगा। डिपॉजिट ग्रोथ भी स्थिर रहने की उम्मीद है, जिसमें CASA डिपॉजिट्स (CASA deposits) का अच्छा हिस्सा रहेगा। क्रेडिट कॉस्ट (credit costs) भी कंट्रोल में रहने की उम्मीद है और GNPA/NNPA अपने कई दशकों के निचले स्तर पर बने रह सकते हैं। बैंक का बोर्ड 12 मई को 2 बिलियन डॉलर (लगभग ₹16,500 करोड़) तक की फंड-रेज़िंग (fund-raising) योजना पर भी विचार करेगा।
