State Bank of India ने दूसरी तिमाही के लिए **₹23,038 करोड़** का शानदार नेट प्रॉफिट दर्ज किया है। हालाँकि, बैंक के चेयरमैन सीएस शेट्टी ने चेतावनी दी है कि अगर ब्याज दरें **50 बेसिस पॉइंट्स** तक बढ़ती हैं, तो कर्ज की मांग में सुस्ती आ सकती है।
देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक State Bank of India ने चालू फाइनेंशियल ईयर की दूसरी तिमाही में ₹23,038 करोड़ का नेट प्रॉफिट कमाकर बाजार को मजबूती दिखाई है। पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले यह 14.3% का उछाल है। हालांकि, दमदार नतीजों के बावजूद आज शेयर बाजार में सुस्ती रही और SBI का स्टॉक 1.70% गिरकर ₹970.25 पर बंद हुआ।
कर्ज की मांग पर अलर्ट
बैंक के चेयरमैन सीएस शेट्टी ने भविष्य को लेकर एक 'कॉशस' रुख अपनाया है। उन्होंने साफ कहा कि अगर ब्याज दरों में 50 बेसिस पॉइंट्स की और बढ़ोतरी होती है, तो 'डिस्क्रीशनरी कंज्यूमर क्रेडिट' (गैर-जरूरी सामानों के लिए लोन) की मांग पर असर पड़ सकता है। बैंक का मानना है कि लोन महंगा होने से लोग खर्च में कटौती करेंगे।
ग्रोथ गाइडेंस और नई रणनीति
बैंक ने अपनी पूरी साल की क्रेडिट ग्रोथ गाइडेंस को 14% से 15% और डिपॉजिट ग्रोथ को 10% से 11% पर बरकरार रखा है। मैनेजमेंट का कहना है कि वे ग्रामीण अर्थव्यवस्था और रबी बुवाई के सीजन पर बारीकी से नजर रखे हुए हैं ताकि रिटेल स्पेंडिंग का सटीक अंदाजा लग सके।
ECL अकाउंटिंग का असर
बैंक अब Reserve Bank of India के नए 'एक्सपेक्टेड क्रेडिट लॉस' (ECL) फ्रेमवर्क की ओर बढ़ रहा है। इसके तहत बैंक को भविष्य के संभावित बैड लोन्स के लिए अभी से प्रोविजनिंग करनी होगी। इस बदलाव के कारण बैंक पर ₹19,500 करोड़ का नेट-ऑफ-टैक्स असर पड़ेगा, जिसे बैंक अगले 4 सालों में धीरे-धीरे एडजस्ट करेगा ताकि बैलेंस शीट पर अचानक दबाव न आए।
इसके साथ ही, बैंक अपनी साइबर सुरक्षा और एपीआई सुरक्षा (API Security) को मजबूत करने पर भी बड़ा निवेश कर रहा है, ताकि डिजिटल बैंकिंग के दौर में सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
