State Bank of India (SBI) ने मार्च तिमाही (Q4) के नतीजे जारी किए, जिसमें बैंक का नेट प्रॉफिट 5.6% बढ़कर ₹19,683.75 करोड़ रहा। यह नंबर पहली नजर में शानदार लगता है, लेकिन शेयर बाजार ने इसे कुछ अलग ही तरह से लिया।
इसके तुरंत बाद, SBI के शेयरों में 7.42% की भारी गिरावट आई। दरअसल, निवेशकों का ध्यान इस बात पर गया कि बैंक की कुल आय (Total Income) 2.4% घटकर ₹1,40,411.77 करोड़ पर आ गई। इससे भी चिंताजनक बात यह है कि बैंक का ऑपरेटिंग प्रॉफिट 11.5% गिरकर ₹27,704.18 करोड़ पर पहुंच गया, जो बैंक की मुख्य कमाई पर दबाव साफ दिखाता है।
इस गिरावट की एक बड़ी वजह 'अन्य आय' (Other Income) में आई 29% की भारी कमी है, जो घटकर ₹17,314.10 करोड़ रह गई। इस आय में फीस, फॉरेक्स गेन और निवेश से होने वाली कमाई शामिल होती है। हालांकि, पूरे फाइनेंशियल ईयर (FY) के लिए SBI का नेट प्रॉफिट ₹80,032.01 करोड़ रहा, जिसमें Yes Bank के स्टेक की बिक्री से मिले ₹4,593.22 करोड़ के एक बड़े फायदे का भी योगदान था। इस एकमुश्त फायदे ने तिमाही की परिचालन कमजोरी को थोड़ा ढंक दिया।
अगर वैल्यूएशन की बात करें, तो SBI का करंट P/E रेश्यो करीब 11-12 है। यह HDFC Bank और ICICI Bank (जिनका P/E 15-20 के आसपास है) और Axis Bank (P/E 13-15) जैसे प्राइवेट बैंकों की तुलना में सस्ता है।
कई ब्रोकरेज हाउसेज ने SBI को 'Strong Buy' रेटिंग दी है और भविष्य के लिए पॉजिटिव आउटलुक जताया है। लेकिन, बाजार की प्रतिक्रिया बताती है कि निवेशक हेडलाइन नेट प्रॉफिट फिगर से ज्यादा कोर इनकम और ऑपरेटिंग प्रॉफिट की सेहत पर ध्यान दे रहे हैं। 'अन्य आय' में गिरावट ने SBI की बाजार की चालों और ट्रेजरी प्रदर्शन पर निर्भरता को उजागर किया है।
लॉन्ग-टर्म की बात करें तो, SBI की वित्तीय स्थिति मजबूत दिखती है। बैंक का कैपिटल एडिक्वेसी रेश्यो 15.40% पर है, और ग्रॉस NPA 1.49% व नेट NPA 0.39% पर है। एनालिस्ट्स का अनुमान है कि FY26-FY28 के बीच अर्निंग्स में 13% की CAGR ग्रोथ देखने को मिल सकती है। FY27 तक RoA 1.1% और RoE 15.9% तक पहुंचने का अनुमान है।
इसके अलावा, SBI ने FY26 के लिए ₹17.35 प्रति इक्विटी शेयर का डिविडेंड भी घोषित किया है।
