रिकॉर्ड प्रॉफिट के पीछे की कहानी: एडवांसेज में बंपर ग्रोथ
State Bank of India (SBI) ने खुलासा किया है कि दिसंबर 2025 को समाप्त हुई तिमाही में उसका स्टैंडअलोन नेट प्रॉफिट 24.5% बढ़कर ₹21,028 करोड़ पर पहुंच गया है। यह बैंक के इतिहास का सबसे बड़ा तिमाही मुनाफा है। इस शानदार प्रदर्शन का श्रेय बैंक के एडवांसेज (Advances) में आई 15.7% की जोरदार उछाल को जाता है, जो अब ₹46.27 लाख करोड़ को पार कर गया है।
बैंक ने रिटेल लोन सेगमेंट में 15% और SME (छोटे और मध्यम उद्यम) लोन में 21% की वृद्धि हासिल की है। यह स्ट्रेटेजिक फोकस बैंक को नेट इंटरेस्ट मार्जिन (NIM) पर पड़ रहे दबाव को संभालने में मदद कर रहा है।
NIM पर दबाव: RBI के रेट कट का असर
हालांकि, SBI के प्रॉफिट में अच्छी ग्रोथ देखने को मिली है, लेकिन बैंक के नेट इंटरेस्ट मार्जिन (NIM) में थोड़ी नरमी आई है। दिसंबर 2025 तिमाही के लिए NIM 3.12% रहा, जो पिछले साल की समान अवधि के 3.15% से थोड़ा कम है। यह स्थिति सिर्फ SBI तक सीमित नहीं है, बल्कि सेक्टर के दूसरे बड़े बैंक भी इसी दबाव से गुजर रहे हैं।
Punjab National Bank (PNB) का डोमेस्टिक NIM 2.65% पर आ गया, जो पिछले साल 3.09% था, जबकि इसके एडवांसेज 11.9% बढ़े। HDFC Bank का NIM 3.5% रहा (पिछले साल 3.6%), और Kotak Mahindra Bank का NIM घटकर 4.5% हो गया (पहले 4.9%)। ये आंकड़े बताते हैं कि RBI द्वारा रेपो रेट में की गई कटौती का बैंकों की प्रॉफिटेबिलिटी पर असर दिख रहा है।
एसेट क्वालिटी पर पकड़ मजबूत
अच्छी बात यह है कि SBI ने अपनी एसेट क्वालिटी (Asset Quality) को स्थिर बनाए रखा है। बैंक का प्रोविजन कवरेज रेशियो (PCR) पिछले साल के 74.6% से सुधरकर 75.5% हो गया है। वहीं, नेट नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स (NPAs) घटकर 0.39% रह गए, जो पहले 0.5% थे। PNB का नेट NPA भी घटकर 0.32% हो गया है, जबकि इसका PCR 90.25% है। HDFC Bank और Kotak Mahindra Bank लगातार इंडस्ट्री में सबसे कम NPA रेशियो बनाए हुए हैं।
परफॉरमेंस और वैल्यूएशन मेट्रिक्स
SBI का एनुअलाइज्ड रिटर्न ऑन एसेट्स (ROA) 1.19% दर्ज किया गया। इस मामले में HDFC Bank और Kotak Mahindra Bank बेहतर परफॉरमेंस दिखा रहे हैं, जिनका एनुअलाइज्ड ROA लगभग 1.92% है। PNB का ROA 1.06% रहा।
वैल्यूएशन की बात करें तो SBI का प्राइस टू बुक वैल्यू (P/B) रेशियो 1.9 है, जबकि PNB 1.0 पर ट्रेड कर रहा है। HDFC Bank को 2.7 के P/B रेशियो के साथ प्रीमियम वैल्यूएशन मिल रहा है।
आगे क्या? ग्रोथ आउटलुक
निवेशक अब यह देखेंगे कि ये बैंक NIM के दबाव के बावजूद अपने लोन बुक ग्रोथ को कैसे बनाए रखते हैं। सरकार द्वारा हाल ही में किए गए ट्रेड डील्स से भारतीय बैंकिंग सेक्टर के लिए नए अवसर खुलने की उम्मीद है, जिससे लोन की मांग बढ़ सकती है और मध्यम अवधि में सेक्टर के लिए एक बेहतर माहौल बन सकता है।