दमदार लोन ग्रोथ, लेकिन मुनाफे पर दबाव
SBI ने मार्च 2026 तिमाही में अपने लोन पोर्टफोलियो में जबरदस्त 17.2% का इजाफा किया है। कुल लोन ₹48.77 लाख करोड़ तक पहुंच गए। इसमें स्मॉल एंड मीडियम एंटरप्राइज (SME) सेगमेंट में 21% और एग्री सेक्टर में 19.7% की ग्रोथ खास रही। बैंक की डिपॉजिट ग्रोथ भी 11% बढ़कर ₹59.75 लाख करोड़ रही, जिससे लोन देने की क्षमता मजबूत हुई।
मुनाफे में क्यों आई कमी?
इतनी अच्छी लोन ग्रोथ के बावजूद, SBI का स्टैंडअलोन नेट प्रॉफिट सिर्फ 5.6% बढ़कर ₹19,683.8 करोड़ पर रुका। इसकी एक बड़ी वजह 'अन्य आय' (Non-Interest Income) में 29% की भारी गिरावट है, जो पिछले साल की समान तिमाही में ₹24,366.7 करोड़ थी, लेकिन इस बार घटकर ₹17,314.1 करोड़ रह गई। इसमें निवेश (Investment) पर ₹1,471 करोड़ का नुकसान भी शामिल है, जबकि पिछले साल इसी अवधि में ₹6,879 करोड़ का फायदा हुआ था। फॉरेन एक्सचेंज और डेरिवेटिव से होने वाली आय भी गिरी है।
इसके अलावा, डोमेस्टिक नेट इंटरेस्ट मार्जिन (NIM) भी घटकर 2.93% पर आ गया, जो पिछले साल 3.14% था। इसका कारण RBI की मॉनेटरी पॉलिसी और रेपो रेट में पहले की गई कटौती रही, जिससे लेंडिंग यील्ड्स कम हुईं।
वैल्यूएशन और बाजार की प्रतिक्रिया
SBI फिलहाल 1.7x के प्राइस-टू-बुक (P/B) मल्टीपल पर ट्रेड कर रहा है। यह HDFC Bank (जो 2.2x पर है) से कम है, लेकिन पंजाब नेशनल बैंक (PNB) (जो 0.9x पर है) से ज्यादा है। नतीजों के बाद, निवेशकों की चिंताएं बढ़ गईं और SBI का शेयर 6.8% गिरकर ₹1,017.9 पर आ गया। ऐसा लगता है कि बाजार को आय की गुणवत्ता (Earnings Quality) और स्थिरता पर चिंताएं हैं।
फंड जुटाने की योजना
SBI अपनी ग्रोथ की जरूरतों को पूरा करने के लिए अंतरराष्ट्रीय बाजार से $2 बिलियन जुटाने की योजना बना रहा है। यह बड़ी बैंकों द्वारा बैलेंस शीट को मजबूत करने के लिए एक सामान्य कदम है।
एसेट क्वालिटी और आगे की राह
बैंक की एसेट क्वालिटी मजबूत बनी हुई है, जहां नेट नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स (NPAs) का अनुपात केवल 0.39% है। हालांकि, राजस्व के स्रोतों में विविधता लाना और मुनाफे को स्थिर रखना SBI के लिए एक बड़ी चुनौती है। FY27 के लिए भारत की अनुमानित आर्थिक ग्रोथ 6%-6.5% रहने की उम्मीद है, जो लोन डिमांड को प्रभावित कर सकती है। इसलिए, यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि SBI कैसे नॉन-इंटरेस्ट इनकम को बढ़ाता है और मार्जिन दबाव को मैनेज करता है।
