संस्थागत निवेशकों का बढ़ता दखल
हाल ही में GQG पार्टनर्स इमर्जिंग मार्केट्स इक्विटी फंड ने Adani Enterprises और Adani Energy Solutions में अपनी बड़ी हिस्सेदारी बेची थी। लेकिन, घरेलू निवेशकों ने इस मौके का फायदा उठाते हुए शेयर खरीदे हैं। एसबीआई म्यूचुअल फंड (SBI Mutual Fund), जो कि भारत का सबसे बड़ा एसेट मैनेजर है, इन डील्स में अकेला खरीदार रहा। इसने बाजार में आई बिकवाली को संभाला और शेयरों में बड़ी गिरावट को रोका।
वैल्यूएशन और बाजार की स्थिति
Adani Enterprises और Adani Energy Solutions के शेयर 2026 के दौरान काफी वोलेटाइल रहे हैं। Adani Enterprises, जो लगभग ₹3,000 के स्तर पर कारोबार कर रहा है और जिसका मार्केट कैप लगभग ₹3.96 लाख करोड़ है, ग्रुप के नए इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स का अहम हिस्सा है। इसका प्राइस-टू-अर्निंग (P/E) रेश्यो करीब 38-40 के आसपास है, जो भविष्य की कमाई को लेकर उम्मीदें दिखाता है। वहीं, Adani Energy Solutions का P/E रेश्यो 70x-80x के आसपास है, जो इसके बढ़ते स्मार्ट-मीटरिंग और पावर ट्रांसमिशन कारोबार की ओर इशारा करता है। एसबीआई म्यूचुअल फंड का इन वैल्यूएशन्स पर खरीदना, इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र में ग्रुप के भविष्य को लेकर भरोसा जताता है।
विश्लेषकों की चिंताएं
GQG पार्टनर्स का बाहर निकलना, 2023 के हिंडनबर्ग मामले के बाद एक पोर्टफोलियो रीबैलेंसिंग का कदम माना जा रहा है, न कि Adani ग्रुप पर भरोसे की कमी। हालांकि, कुछ विश्लेषक ग्रुप के डेट-टू-इक्विटी रेश्यो और कैपिटल-इंटेंसिव बिजनेस मॉडल को लेकर चिंता जता रहे हैं। Adani ग्रुप की कंपनियां लगातार कैपिटल एक्सपेंडिचर और ग्रोथ टारगेट्स पर निर्भर हैं। हाल ही में अमेरिकी धोखाधड़ी के आरोपों का खारिज होना एक पॉजिटिव संकेत था, लेकिन निवेशकों को यह याद रखना होगा कि रेगुलेटरी जांच का खतरा हमेशा बना रहता है।
भविष्य की रणनीति
भविष्य में Adani ग्रुप के शेयरों की मजबूती प्रोजेक्ट्स के एग्जीक्यूशन और फ्री कैश फ्लो पर निर्भर करेगी। जेफरीज (Jefferies) जैसी ब्रोकरेज फर्मों ने Adani की कुछ कंपनियों पर 'बाय' रेटिंग बनाए रखी है, जिसका आधार लंबी अवधि की मांग और ऑपरेशनल मोमेंटम है। जैसे-जैसे एसबीआई म्यूचुअल फंड और अन्य घरेलू निवेशक अपनी पोजीशन मजबूत करेंगे, बाजार इस बात पर नजर रखेगा कि क्या ये कंपनियां अपने इंफ्रास्ट्रक्चर पाइपलाइन को लाभ में बदल पाती हैं या नहीं।
