SBI Funds Management (SBI MF) की एक रिपोर्ट के मुताबिक, सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) में निवेश करने वाले ग्राहक, सिर्फ सेविंग अकाउंट रखने वाले ग्राहकों से 4 गुना ज़्यादा वैल्यू रखते हैं। अब कंपनी SBI के 2.1 करोड़ सैलरी अकाउंट होल्डर्स को टारगेट कर रही है ताकि उन्हें गोल-बेस्ड इन्वेस्टमेंट की ओर बढ़ाकर SIP बुक को दोगुना किया जा सके।
SIP की वैल्यू क्यों ज़्यादा?
SBI Funds Management (SBI MF) अपने पैरेंट बैंक, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) के बड़े डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क का फायदा उठाकर अपने सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) बिज़नेस को तेज़ी से बढ़ाना चाहता है। कंपनी की प्लानिंग है कि इन्वेस्टमेंट प्रोडक्ट्स को सीधे बैंकिंग एक्सपीरियंस के साथ इंटीग्रेट किया जाए, ताकि सेविंग अकाउंट रखने वाले ज़्यादा से ज़्यादा ग्राहक म्यूचुअल फंड (Mutual Fund) में एक्टिव इन्वेस्टर बन सकें।
SBI MF के अंदरूनी असेसमेंट से पता चला है कि जो ग्राहक सेविंग अकाउंट और SIP दोनों रखते हैं, वो सिर्फ सेविंग अकाउंट रखने वाले ग्राहकों की तुलना में बैंक के लिए लगभग 4 गुना ज़्यादा वैल्यूएबल होते हैं।
2.1 करोड़ सैलरी अकाउंट्स पर फोकस
SBI MF के MD और CEO, देबाशीष मिश्रा ने बताया कि बैंक के 53 करोड़ कस्टमर बेस में ग्रोथ का बड़ा मौका है। कंपनी खास तौर पर स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के 2.1 करोड़ सैलरी अकाउंट्स पर ध्यान दे रही है। मैनेजमेंट का मानना है कि इन सैलरी पाने वाले ग्राहकों को रिटायरमेंट, बच्चों की पढ़ाई या शादी जैसे लॉन्ग-टर्म फाइनेंशियल गोल्स के लिए कम से कम एक SIP शुरू करने के लिए प्रेरित करके मौजूदा SIP बुक को दोगुना किया जा सकता है।
बैंक और एसेट मैनेजमेंट कंपनी के बीच तालमेल
यह स्ट्रेटेजी बैंक और उसकी एसेट मैनेजमेंट कंपनी के बीच मज़बूत तालमेल को दिखाती है, जिसे बोर्ड लेवल पर भी सपोर्ट मिल रहा है। SBI के चेयरमैन, SBI MF के बोर्ड को भी चेयर करते हैं, जिससे बैंक अपनी इन्वेस्टमेंट प्रोडक्ट्स को कस्टमर एंगेजमेंट स्ट्रेटेजी का अहम हिस्सा बनाने में एक्टिव भूमिका निभा रहा है। SBI, पब्लिक सेक्टर बैंकों के बीच म्यूचुअल फंड डिस्ट्रीब्यूशन में पहले से ही एक मज़बूत पोजीशन रखता है।
फिलहाल, SBI MF लगभग ₹2.75 लाख करोड़ के म्यूचुअल फंड एसेट्स को मैनेज कर रहा है, जो दूसरे बड़े पब्लिक सेक्टर लेंडर्स के डिस्ट्रीब्यूशन वॉल्यूम से काफी ज़्यादा है।
सेविंग्स का वित्तीयकरण (Financialization)
मैनेजमेंट का कहना है कि भारत में निवेशकों का व्यवहार फंडामेंटली बदल रहा है। परिवार अब सेविंग अकाउंट को सिर्फ निष्क्रिय कैश रखने की जगह के तौर पर नहीं देख रहे, बल्कि डिजिटल बैंकिंग टूल्स का इस्तेमाल करके SIP के ज़रिए इन्वेस्टमेंट को ऑटोमेट कर रहे हैं। इस वित्तीयकरण (financialization) से बैंक के लिए डिपॉजिट के बाहर जाने का खतरा कम हो जाता है, क्योंकि गोल-बेस्ड इन्वेस्टमेंट में लगे ग्राहक इंस्टीट्यूशन के साथ ज़्यादा लंबे और गहरे रिश्ते रखते हैं।
बैंक अपनी 98.7% पैन इंडिया रीच का इस्तेमाल करके हाइब्रिड म्यूचुअल फंड प्रोडक्ट्स को बढ़ावा दे रहा है, जिनमें अक्सर ज़्यादा डिस्ट्रीब्यूशन फीस होती है और जो एसेट मैनेजर के लिए बेसिक सेविंग प्रोडक्ट्स की तुलना में बेहतर रेकरिंग रेवेन्यू प्रदान करते हैं। निवेशकों को सलाह है कि वे SIP बुक की ग्रोथ और सैलरी अकाउंट होल्डर्स के कन्वर्शन रेट पर नज़र रखें, क्योंकि ये आने वाली तिमाहियों में बैंक की फी-बेस्ड इनकम को बनाए रखने की क्षमता के महत्वपूर्ण इंडिकेटर होंगे।
