भारतीय स्टेट बैंक (SBI) ने वित्त वर्ष 2025-26 में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल करके लगभग ₹1 लाख करोड़ के MSME लोन को सफलतापूर्वक मंजूरी दी है। बैंक चेक प्रोसेसिंग को ऑटोमेट करने और जोखिम प्रबंधन को बेहतर बनाने के लिए नई तकनीकें भी अपना रहा है, जिसका लक्ष्य परिचालन दक्षता बढ़ाना है।
AI से MSME को मिला ₹1 लाख करोड़ का सहारा
भारतीय स्टेट बैंक (SBI) ने वित्त वर्ष 2025-26 में माइक्रो, स्मॉल और मीडियम एंटरप्राइजेज (MSME) सेक्टर के लिए ₹1 लाख करोड़ के लोन को प्रोसेस और अंडरराइट करने में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का सफलतापूर्वक इस्तेमाल किया है। ये लोन, जिनकी कीमत ₹5 करोड़ तक थी, नए और पुराने दोनों तरह के ग्राहकों को दिए गए। यह कदम बैंक के क्रेडिट रिस्क के मूल्यांकन के तरीके में एक महत्वपूर्ण बदलाव का संकेत देता है।
AI-संचालित लोन प्रोसेसिंग
बैंक का AI-पावर्ड सिस्टम एक बिजनेस रूल इंजन पर निर्भर करता है, जो लोन देने के निर्णय लेने के लिए विभिन्न डेटा पॉइंट्स को प्रोसेस करता है। इसमें GST फाइलिंग, क्रेडिट ब्यूरो रिपोर्ट्स, बैंक अकाउंट डेटा और अन्य अनस्ट्रक्चर्ड इनपुट से जानकारी को एकीकृत करना शामिल है। इन मूल्यांकनों को ऑटोमेट करके, SBI ने अपनी अंडरराइटिंग प्रक्रिया को सुव्यवस्थित किया है। मैनेजिंग डायरेक्टर रमा मोहन राव अमारा ने FIBAC 2026 इवेंट में बताया कि इस तरीके ने न केवल बड़ी मात्रा में फाइनेंसिंग को संभाला है, बल्कि इन AI मॉडलों द्वारा अंडरराइट किए गए पोर्टफोलियो के भीतर नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स (NPAs) को कम करने में भी योगदान दिया है।
लोन के अलावा, SBI ₹10,000 तक के चेक के प्रोसेसिंग को ऑटोमेट करने के लिए लार्ज लैंग्वेज मॉडल (LLMs) को इंटीग्रेट कर रहा है। ये छोटी-मूल्य की ट्रांजैक्शन्स बैंक के कुल चेक वॉल्यूम का लगभग 25% हैं। यह सिस्टम स्वचालित रूप से आवश्यक फील्ड्स और कंप्लायंस की जांच करता है, जिससे हर ट्रांजैक्शन के लिए मानवीय हस्तक्षेप के बिना सीधे प्रोसेसिंग हो पाती है। यह ऑटोमेशन कर्मचारियों का समय बचाता है, जिससे रिलेशनशिप मैनेजर मैनुअल डेटा कलेक्शन और एनालिसिस जैसे कामों के बजाय अधिक रणनीतिक ग्राहक जुड़ाव कार्यों पर ध्यान केंद्रित कर सकते हैं।
जोखिम और भविष्य का दृष्टिकोण
जहां AI को अपनाने का उद्देश्य दक्षता में सुधार करना है, वहीं यह नई चुनौतियां भी पेश करता है। डिजिटल फाइनेंस और जटिल एल्गोरिदम पर बढ़ती निर्भरता डेटा सुरक्षा और साइबर सुरक्षा के संबंध में अंतर्निहित जोखिम लाती है। इसके अतिरिक्त, बैंक को इन उन्नत तकनीकों को अपने मौजूदा लीगेसी इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ एकीकृत करने का प्रबंधन करना होगा, जिसमें तकनीकी जटिलताएं शामिल हो सकती हैं।
निवेशक और हितधारक इस बात पर नजर रख सकते हैं कि ये तकनीकी बदलाव बैंक की दीर्घकालिक परिचालन लागत को कैसे प्रभावित करते हैं। हालांकि बैंक कर्मचारी संसाधन आवंटन और ग्राहक संतुष्टि में शुरुआती सकारात्मक परिणाम देख रहा है, समग्र लागत-से-आय अनुपात पर पूरा प्रभाव संभवतः समय के साथ सिस्टम के स्केल होने पर अधिक स्पष्ट होगा। बैंक एक नियंत्रण तंत्र बनाए रखता है, जिसमें एक समर्पित जोखिम इकाई भी शामिल है, ताकि सटीकता सुनिश्चित करने और मॉडल को आवश्यकतानुसार परिष्कृत करने के लिए AI-प्रोसेस्ड गतिविधियों के सैंपल का ऑडिट किया जा सके।
