State Bank of India ने अपने डिजिटल इकोसिस्टम को सुरक्षित बनाने के लिए नए Cybersecurity Centre of Excellence, 'CyRIS' की शुरुआत की है। इस कदम के तहत बैंक अपने **1,81,000** कर्मचारियों को ट्रेनिंग दे रहा है और AI-आधारित सुरक्षा उपकरणों को अपना रहा है।
डिजिटल सुरक्षा का नया कवच
बढ़ते डिजिटल ट्रांजेक्शन के दौर में बैंकिंग सेक्टर पर साइबर खतरों का दबाव भी बढ़ रहा है। इसी को ध्यान में रखते हुए State Bank of India ने 'CyRIS' नाम से एक डेडिकेटेड सेंटर खोला है। यह सेंटर अब रिएक्टिव के बजाय प्रोएक्टिव अप्रोच अपनाएगा, ताकि किसी भी फाइनेंशियल फ्रॉड को बड़े स्तर पर पहुंचने से पहले ही रोका जा सके।
AI और भविष्य की तैयारी
CyRIS का मुख्य काम थ्रेट इंटेलिजेंस, मैलवेयर एनालिसिस और डिजिटल फॉरेंसिक्स पर फोकस करना होगा। बैंक अपने सिस्टम में AI-संचालित प्रोटोकॉल को एकीकृत (Integrate) कर रहा है और क्वांटम-सेफ टेक्नोलॉजी पर काम शुरू कर दिया है ताकि संगठित अपराधी समूहों और जटिल साइबर हमलों से मुकाबला किया जा सके।
कर्मचारियों की ट्रेनिंग और रिस्क मैनेजमेंट
तकनीक के साथ-साथ बैंक ने अपने ह्यूमन कैपिटल पर भी बड़ा दांव खेला है। फाइनेंशियल ईयर 2026 में अब तक 1,81,000 कर्मचारियों ने साइबर सिक्योरिटी ट्रेनिंग मॉड्यूल पूरा किया है। बैंक का मानना है कि बैंकिंग फ्रॉड में मानवीय चूक (Human Error) एक बड़ी वजह होती है, जिसे ट्रेनिंग के जरिए कम किया जा सकता है।
निवेशकों के लिए क्या है मायने?
Reserve Bank of India द्वारा IT गवर्नेंस और फ्रॉड डिटेक्शन को लेकर कड़े नियमों के बीच, SBI का यह निवेश बेहद अहम है। हालांकि, इन सेंटर्स को सेटअप और मेंटेन करने में खर्च आता है, लेकिन लॉन्ग-टर्म में यह बैंक की ऑपरेशनल स्थिरता और कस्टमर के भरोसे के लिए अनिवार्य है। निवेशकों की नजर इस बात पर होगी कि कैसे बैंक अपने प्रॉफिट मार्जिन को प्रभावित किए बिना इस जरूरी टेक्नोलॉजी खर्च को मैनेज करता है।
