State Bank of India ने एक नया लेंडिंग मॉडल 'CHAKRA' लॉन्च किया है। अब बैंक फिजिकल कोलैटरल की जगह भविष्य में होने वाली कमाई (Cash Flow) को आधार बनाकर डेटा सेंटर और सोलर मैन्युफैक्चरिंग जैसे सेक्टर्स को लोन देगा।
कोलैटरल नहीं, अब कैश-फ्लो पर भरोसा
सालों तक बैंकों ने लोन देने के लिए जमीन या बिल्डिंग जैसे फिजिकल एसेट्स को प्राथमिकता दी है। लेकिन टेक्नोलॉजी और रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर की कंपनियां ऐसी हैं, जिनके पास फिजिकल एसेट्स कम होते हैं। SBI का नया 'CHAKRA' फ्रेमवर्क इसी कमी को दूर करने के लिए आया है। अब बैंक कंपनी के मौजूदा एसेट्स देखने के बजाय यह देखेगा कि प्रोजेक्ट भविष्य में कितना पैसा कमा सकता है (Future Cash Flow)।
क्यों है यह कदम अहम?
डेटा सेंटर और सोलर एनर्जी जैसे सेक्टर भारत की डिजिटल और ग्रीन एनर्जी क्रांति के लिए इंजन हैं। इन सेक्टर्स में भारी इन्वेस्टमेंट की जरूरत होती है। CHAKRA मॉडल के जरिए बैंक यह जांचेगा कि बिजनेस मॉडल कितना मजबूत है और उसकी ऑपरेशनल इकोनॉमिक्स कैसी है।
निवेशकों के लिए जोखिम और सावधानी
निवेशकों को यह ध्यान रखना चाहिए कि 'कैश-फ्लो बेस्ड लेंडिंग' परंपरागत सुरक्षित लोन (Secured Lending) के मुकाबले ज्यादा जोखिम भरी होती है। अगर कंपनी उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर पाती, तो बैंक के पास रिकवरी के लिए बहुत कम एसेट्स बचेंगे। इस जोखिम को कम करने के लिए SBI ने अपनी टीम को इन हाई-टेक और सोलर प्रोजेक्ट्स की तकनीकी समझ (Technical Literacy) बढ़ाने के निर्देश दिए हैं।
आगे क्या देखना होगा?
यह बदलाव भारतीय बैंकिंग सिस्टम के आधुनिक होने का संकेत है। आने वाली तिमाहियों में निवेशकों की नजर इस बात पर होनी चाहिए कि CHAKRA मॉडल के तहत बांटे गए लोन का प्रदर्शन कैसा रहता है। साथ ही, इन सेक्टर्स में NPA (Non-Performing Asset) का लेवल क्या रहता है और बैंक का मैनेजमेंट इस नए पोर्टफोलियो पर क्या अपडेट देता है, यह शेयर की दिशा तय करेगा।
