State Bank of India (SBI) अपने होम लोन पोर्टफोलियो में एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करने जा रहा है। बैंक का लोन बुक जल्द ही **₹10 लाख करोड़** के आंकड़े को छू लेगा, जबकि मार्केट में इसकी **28%** हिस्सेदारी कायम है। लिक्विडिटी मैनेज करने के लिए बैंक अब एसेट सिक्योरिटाइजेशन और विदेशी फंड जुटाने की रणनीति पर काम कर रहा है।
देश का सबसे बड़ा सरकारी बैंक SBI होम लोन के मोर्चे पर एक बड़ा इतिहास रचने की तैयारी में है। चालू तिमाही के अंत तक बैंक का होम लोन पोर्टफोलियो ₹10 लाख करोड़ के जादुई आंकड़े को पार करने की उम्मीद है। यह उपलब्धि न केवल बैंक की बाजार में मजबूती को दिखाती है, बल्कि भारतीय रिटेल लोन मार्केट में इसके 28% मार्केट शेयर को भी पुख्ता करती है।
नई रणनीति: सिक्योरिटाइजेशन का दांव
बैंक का फोकस केवल लोन बांटने पर नहीं, बल्कि बैलेंस शीट को दुरुस्त रखने पर भी है। मौजूदा समय में पूरे बैंकिंग सेक्टर में क्रेडिट ग्रोथ डिपॉजिट ग्रोथ से कहीं ज्यादा तेज है। इस दबाव को कम करने के लिए SBI अब 'सिक्योरिटाइजेशन' (Securitization) का रास्ता अपना रहा है। इसके तहत बैंक अपने होम लोन के एक हिस्से को बंडल बनाकर निवेशकों को बेचेगा। इससे बैंक की बुक्स खाली होंगी और नई फंडिंग के लिए नकदी (Cash) उपलब्ध होगी, जिससे डिपॉजिट पर पूरी तरह निर्भर रहे बिना लोन डिमांड पूरी की जा सकेगी।
विदेशी फंड और RBI की डेडलाइन
फंडिंग के मोर्चे पर बैंक बेहद सतर्क है। Reserve Bank of India ने 31 अगस्त, 2026 तक FCNR-B डिपॉजिट स्वैप विंडो बंद करने का फैसला लिया है। इसे देखते हुए SBI ने अब आक्रामक रुख अपनाया है। बैंक नॉन-रेसिडेंट इंडियंस (NRI) और विदेशी निवेशकों से करीब $10 अरब (USD 10 Billion) जुटाने की दिशा में काम कर रहा है।
निवेशकों के लिए संकेत
निवेशकों को अब इस बात पर नजर रखनी चाहिए कि बैंक रिटेल विस्तार और लिक्विडिटी के बीच कैसे संतुलन बनाता है। हालांकि होम लोन का एसेट क्वालिटी ट्रैक रिकॉर्ड काफी बेहतर रहा है, लेकिन यदि डिपॉजिट ग्रोथ और लोन बांटने की रफ्तार के बीच का फासला कम नहीं हुआ, तो सिक्योरिटाइजेशन और विदेशी निवेश की सफलता ही बैंक की भविष्य की लेंडिंग कैपेसिटी तय करेगी।
