SBI Funds Management के शेयर अपने ₹574 के IPO प्राइस से नीचे ₹566.50 पर आ गए हैं। मार्केट में डेब्यू के महज एक हफ्ते के अंदर स्टॉक में लगातार गिरावट देखी जा रही है। यह कंपनी भारत की सबसे बड़ी एसेट मैनेजर है।
SBI Funds Management के शेयर गिरे IPO प्राइस से नीचे
SBI Funds Management के शेयरधारकों के लिए बाजार में शुरुआत मुश्किलों भरी रही है। कंपनी के शेयर अपने इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग (IPO) प्राइस ₹574 से नीचे फिसल गए हैं। गुरुवार, 30 जुलाई 2026 को नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) पर स्टॉक ₹566.50 पर ट्रेड कर रहा था, जो कि 1.66% की गिरावट को दर्शाता है। यह गिरावट इस बात का संकेत है कि पिछले सात ट्रेडिंग सेशन में से छह में स्टॉक ने गिरावट दर्ज की है।
IPO और मार्केट डेब्यू का हाल
कंपनी ने 21 जुलाई को मार्केट में कदम रखा था, तब शेयरों ने ₹613.30 पर ओपनिंग की थी, जो IPO प्राइस से करीब 6.85% ज्यादा था। यह पब्लिक इश्यू ₹545 से ₹574 की रेंज में था और निवेशकों ने इसे 41.66 गुना सब्सक्राइब किया था। इश्यू का कुल साइज ₹9,812.91 करोड़ था। हालांकि, शुरुआती तेजी के बाद, शेयर अपने लिस्टिंग गेन को बनाए रखने के लिए संघर्ष कर रहा है और लगातार ऑफर प्राइस के करीब या नीचे कारोबार कर रहा है।
कंपनी का बिजनेस स्केल
SBI Funds Management भारतीय वित्तीय क्षेत्र का एक बड़ा नाम है और यह प्रॉपर्टी के अनुसार देश की सबसे बड़ी एसेट मैनेजमेंट कंपनी (AMC) है। 31 मार्च 2026 तक, कंपनी के पास म्यूचुअल फंड एसेट्स में कुल ₹12.51 लाख करोड़ थे, जिससे उसका मार्केट शेयर 15.3% रहा। कंपनी की स्थापना 1987 में हुई थी।
निवेशकों के लिए, यह शेयर की चाल लिस्टिंग के बाद के शुरुआती सेंटिमेंट को दर्शाती है। भले ही कंपनी की म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री में मजबूत पकड़ है, लेकिन AMC बाजार के उतार-चढ़ाव के प्रति बहुत संवेदनशील होते हैं। इक्विटी मार्केट का प्रदर्शन, म्यूचुअल फंड स्कीम्स में नेट इनफ्लो और अन्य बड़े प्लेयर्स से कॉम्पिटिशन, ये सब निवेशक के भरोसे को प्रभावित करते हैं।
आगे चलकर निवेशकों को कंपनी के तिमाही नतीजों पर नजर रखनी होगी। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या कंपनी इस प्रतिस्पर्धी सेक्टर में अपने प्रतिद्वंद्वियों के मुकाबले अपनी मार्केट शेयर बनाए रख पाती है। इसके अलावा, व्यापक बाजार के रुझानों पर भी ध्यान देना जरूरी है, क्योंकि एसेट मैनेजर्स का प्रदर्शन अक्सर समग्र शेयर बाजार के स्वास्थ्य और म्यूचुअल फंड उत्पादों के प्रति निवेशकों की रुचि से जुड़ा होता है।
