SBI Funds Management ने IPO के बाद अपनी पहली तिमाही के नतीजे पेश कर दिए हैं। जून तिमाही में कंपनी का नेट प्रॉफिट **3.7%** बढ़कर **₹880 करोड़** रहा। कंपनी की एसेट्स अंडर मैनेजमेंट (AUM) में **11%** का उछाल आया है, जो अब **₹12.6 लाख करोड़** को पार कर गई है।
IPO के बाद दमदार प्रदर्शन
SBI Funds Management ने जुलाई में शेयर बाजार में कदम रखने के बाद पहली बार अपनी कमाई के आंकड़े जारी किए हैं। जून तिमाही में कंपनी का कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट पिछले साल की इसी अवधि के मुकाबले 3.7% बढ़कर ₹880 करोड़ हो गया है, जबकि पिछले साल यह ₹849 करोड़ था। यह ग्रोथ कंपनी की बाजार की चुनौतियों से निपटने की क्षमता को दर्शाता है, जिसमें रिटेल निवेशकों की लगातार दिलचस्पी और म्यूचुअल फंड में डोमेस्टिक इनफ्लो का बड़ा योगदान रहा।
एसेट्स में बड़ी बढ़त
एसेट मैनेजर की एवरेज एसेट्स अंडर मैनेजमेंट (AUM) में 11% की वृद्धि हुई है और यह ₹12.6 लाख करोड़ तक पहुंच गई है। इस बढ़ोतरी के साथ, SBI Funds Management भारत के सबसे बड़े म्यूचुअल फंड मैनेजर के तौर पर अपनी स्थिति मजबूत कर चुका है, जिसका मार्केट शेयर फिलहाल 15.1% है। कंपनी की एसेट्स में एक्टिवली मैनेज्ड इक्विटी एसेट्स ₹8.6 लाख करोड़ रहीं, जो 10% ज्यादा हैं। वहीं, पैसिव फंड सेगमेंट 12% बढ़कर ₹4 लाख करोड़ हो गया। पैसिव फंड्स में कंपनी का मार्केट शेयर 27.4% है, जो उन निवेशकों के बीच बढ़ रही मांग को दिखाता है जो कम लागत वाले इंडेक्स-ट्रैकिंग प्रोडक्ट्स चाहते हैं।
रेवेन्यू और लागत का गणित
ऑपरेशंस से कंपनी का कंसोलिडेटेड रेवेन्यू लगभग 15% बढ़कर ₹1,153 करोड़ हो गया। हालांकि, रेवेन्यू में यह उछाल नेट प्रॉफिट में पूरी तरह नहीं दिखा, क्योंकि 'अन्य आय' (other income) में भारी कमी आई, जो पिछले साल की समान तिमाही के ₹237 करोड़ से काफी कम थी। कंपनी ने कहा कि सिस्टेमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) से मिले मजबूत योगदान ने प्रदर्शन को बनाए रखने में मदद की। 30 जून तक SIP में 15% की वृद्धि देखी गई, जो ₹2 लाख करोड़ तक पहुंच गई। साथ ही, कंपनी ने अपने ग्राहक आधार को भी बढ़ाया है, व्यक्तिगत ग्राहकों की संख्या 12% बढ़कर 1.82 करोड़ हो गई, जबकि कुल लाइव फोलियो 14% बढ़कर 2.2 करोड़ हो गए।
भविष्य की रणनीति
SBI Funds Management अब अल्टरनेटिव इन्वेस्टमेंट फंड्स (AIFs) और पोर्टफोलियो मैनेजमेंट सर्विसेज (PMS) जैसे नए क्षेत्रों में भी विस्तार कर रहा है। इन सेगमेंट के साथ-साथ एडवाइजरी और ऑफशोर फंड्स में AUM ₹16.5 लाख करोड़ तक पहुंच गया है। खासकर AIF सेगमेंट में 29% की जोरदार बढ़ोतरी देखी गई, जो लगभग ₹6,800 करोड़ रहा। इससे पता चलता है कि कंपनी पारंपरिक म्यूचुअल फंड से हटकर ज्यादा वैल्यू वाले प्रोडक्ट्स की ओर बढ़ रही है। अब निवेशकों की नजर इस बात पर रहेगी कि क्या कंपनी विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) की अस्थिर गतिविधियों के बीच एसेट्स जुटाने की यह रफ्तार बनाए रख पाती है और क्या वे टेक्नोलॉजी से जुड़े खर्चों का कुशलतापूर्वक प्रबंधन करके इस प्रतिस्पर्धी एसेट मैनेजमेंट सेक्टर में अपनी मार्जिन बनाए रख पाएंगे।
