SBI Funds Management, देश की सबसे बड़ी एसेट मैनेजमेंट कंपनी, अगले हफ़्ते **$1.2 बिलियन** (लगभग ₹10,000 करोड़) का अपना IPO लाने की तैयारी में है। इसे ग्लोबल सॉवरेन वेल्थ फंड ADIA और GIC काAnchor Commitment मिला है।
भारत के सबसे बड़े AMC का IPO
SBI Funds Management, जो State Bank of India और यूरोपीय फर्म Amundi का जॉइंट वेंचर है, अगले हफ़्ते अपना इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग (IPO) लॉन्च करने जा रहा है। कंपनी अपने प्रमोटर्स (SBI और Amundi) की 10% हिस्सेदारी बेचकर करीब $1.2 बिलियन (लगभग ₹10,000 करोड़) जुटाने का लक्ष्य लेकर चल रही है। यह IPO भारत में बड़ी फाइनेंशियल सर्विसेज कंपनियों के लिए इंस्टीट्यूशनल डिमांड का एक अहम टेस्ट साबित होगा।
ग्लोबल फंड्स का बड़ा भरोसा
इस IPO को ग्लोबल निवेशकों से जबरदस्त दिलचस्पी मिली है। खास तौर पर, अबू धाबी इन्वेस्टमेंट अथॉरिटी (ADIA) और सिंगापुर के GIC जैसे सॉवरेन वेल्थ फंड्स इसमें निवेश करने में रुचि दिखा चुके हैं। शुरुआती संकेतों के मुताबिक, इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स के लिए रखा गया हिस्सा, आवंटित कोटे से करीब 5 गुना ज्यादा सब्सक्राइब हो चुका है। यह हाल की मार्केट वोलैटिलिटी के बावजूद बड़े ग्लोबल निवेशकों की मजबूत डिमांड को दर्शाता है।
कंपनी का आकार और मार्केट पोजिशन
मार्च 2026 तक, SBI Funds Management के पास करीब ₹12.5 ट्रिलियन (या $131.1 बिलियन) की एसेट्स अंडर मैनेजमेंट (AUM) है। कंपनी का अनुमानित वैल्यूएशन $12.3 बिलियन है, जो इसे भारतीय एसेट मैनेजमेंट इंडस्ट्री में एक बड़ा खिलाड़ी बनाता है। कंपनी का बिजनेस मॉडल उसके म्यूचुअल फंड्स और पोर्टफोलियो मैनेजमेंट सर्विसेज से मिलने वाले मैनेजमेंट फीस पर टिका है।
यह IPO ऐसे समय में आ रहा है जब इस साल की शुरुआत में फॉरेन इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (FIIs) की ओर से भारतीय सेकेंडरी मार्केट में $29 बिलियन की भारी निकासी देखी गई थी। इस IPO की सफल क्लोजिंग, साल के अंत में आने वाले Reliance Jio और National Stock Exchange जैसे बड़े पब्लिक इश्यूज के लिए सेंटीमेंट बूस्टर का काम कर सकती है।
निवेशकों के लिए क्या है खास?
कंपनी ने कुल इश्यू साइज का 50% रिटेल निवेशकों के लिए रिजर्व रखा है, जिसका मकसद शेयरहोल्डर बेस को और बढ़ाना है। हालांकि इंस्टीट्यूशनल डिमांड मजबूत दिख रही है, IPO की अंतिम सफलता शेयर की प्राइसिंग और अगले हफ़्ते सब्सक्रिप्शन के दौरान रिटेल निवेशकों की रुचि पर निर्भर करेगी।
निवेशकों को फाइनल प्राइस बैंड, एंकर इन्वेस्टर पोर्शन की तारीखों और रिटेल व इंस्टीट्यूशनल कैटेगरी में सब्सक्रिप्शन ट्रेंड्स पर नज़र रखनी चाहिए। साथ ही, यह भी देखना होगा कि यह कंपनी बढ़ती फीस-आधारित प्रतिस्पर्धा के बीच अपने प्रॉफिट मार्जिन को बनाए रखने में कितनी सफल रहती है।
