SBI Funds Management के ₹11,693 करोड़ के IPO में निवेशकों ने दिखाया ज़बरदस्त जोश! दूसरे दिन ही यह इश्यू फुल सब्सक्राइब हो गया, खासकर नॉन-इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (NIIs) की ओर से भारी डिमांड देखने को मिली।
SBI Funds Management का इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग (IPO) एक बड़े पड़ाव पर पहुंच गया है। बिडिंग के दूसरे दिन दोपहर तक यह इश्यू पूरी तरह सब्सक्राइब हो चुका था। एक्सचेंजों से मिले आंकड़ों के अनुसार, 11:45 AM तक IPO 1.24 गुना सब्सक्राइब हुआ, जो रिटेल और नॉन-इंस्टीट्यूशनल निवेशकों की मजबूत रुचि को दर्शाता है।
किसने लगाई सबसे ज़्यादा बोली?
इस IPO में नॉन-इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (NIIs) का दबदबा रहा, जिन्होंने अपने हिस्से के 2.86 गुना ज़्यादा बोली लगाई। रिटेल इंडिविजुअल इन्वेस्टर्स ने भी अपने कोटे को पूरी तरह से बुक कर लिया, जिसके लिए 1.02 गुना सब्सक्रिप्शन मिला। कंपनी के एम्प्लॉईज़ और मौजूदा शेयरहोल्डर्स ने भी दिलचस्पी दिखाई, जिनके लिए रखे गए हिस्से 1.56 गुना और 1.97 गुना सब्सक्राइब हुए। वहीं, क्वॉलिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स (QIBs) के लिए आरक्षित हिस्सा अभी सिर्फ 0.08 गुना ही सब्सक्राइब हो पाया था, क्योंकि ये बड़े निवेशक अक्सर इश्यू बंद होने के करीब ही अपनी बोलियां लगाते हैं।
बड़े नामों का भरोसा
पब्लिक इश्यू शुरू होने से पहले, SBI Funds Management ने एंकर इन्वेस्टर्स से ₹2,663 करोड़ जुटाकर अपनी स्थिति मज़बूत की थी। इस लिस्ट में GIC, BlackRock, Abu Dhabi Investment Authority, Fidelity Management & Research और Goldman Sachs Asset Management जैसे बड़े ग्लोबल खिलाड़ी शामिल हैं। इसके अलावा, लाइफ इंश्योरेंस कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (LIC) और HDFC Mutual Fund, ICICI Prudential Mutual Fund जैसे बड़े डोमेस्टिक म्यूचुअल फंड हाउसों ने भी एंकर बुक में पैसा लगाया। मार्केट में इसे कंपनी के बिजनेस मॉडल पर एक मजबूत भरोसे का संकेत माना जा रहा है।
ऑफर स्ट्रक्चर और कैपिटल पर असर
यह IPO, जो 16 जुलाई, 2026 को बंद होगा, ₹545 से ₹574 प्रति शेयर के प्राइस बैंड पर आ रहा है। यह पूरी तरह से 'ऑफर फॉर सेल' (OFS) है, जिसका मतलब है कि पब्लिक से जुटाए गए पैसों का कोई नया फंड कंपनी की बैलेंस शीट में नहीं जाएगा। इसके बजाय, मौजूदा शेयरहोल्डर्स - स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) और इंटरनेशनल एसेट मैनेजर Amundi - अपनी हिस्सेदारी का कुछ हिस्सा बेच रहे हैं। SBI अपनी 6.3% हिस्सेदारी और Amundi अपनी 3.7% हिस्सेदारी बेच रही है। चूंकि यह OFS है, इसलिए लिस्टिंग से होने वाली कमाई का कंपनी के कैश रिजर्व और वर्किंग कैपिटल पर कोई असर नहीं पड़ेगा।
