ग्लोबल मार्केट में क्रूड ऑयल की कीमतें **$100** के पार निकलने के बाद, State Bank of India (SBI) की रिसर्च टीम ने बड़ा अनुमान जताया है। SBI का मानना है कि अक्टूबर और दिसंबर के बीच RBI ब्याज दरों में कुल **50 बेसिस पॉइंट्स** तक का इजाफा कर सकता है।
भारत की मौद्रिक नीति (Monetary Policy) के मोर्चे पर अब एक बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। पहले मार्केट में यह उम्मीद जताई जा रही थी कि RBI दरों को स्थिर रखेगा, लेकिन SBI की रिसर्च रिपोर्ट ने इसे पूरी तरह बदल दिया है। महंगाई पर लगाम लगाने के लिए अब अक्टूबर और दिसंबर में 25-25 बेसिस पॉइंट्स की दो लगातार बढ़ोतरी की उम्मीद की जा रही है।
क्यों बढ़ेंगी दरें?
इस संभावित सख्ती के पीछे सबसे बड़ी वजह क्रूड ऑयल है, जिसकी कीमतें $100 प्रति बैरल के स्तर को पार कर चुकी हैं। पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण सप्लाई चेन पर दबाव बना है, जिससे एनर्जी कॉस्ट बढ़ रही है। RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने संकेत दिए हैं कि 5-7 अक्टूबर, 2026 को होने वाली मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) की बैठक में ग्रोथ और महंगाई के आंकड़ों पर फिर से मंथन होगा।
निवेशकों के लिए क्या हैं संकेत?
ब्याज दरों का सीधा असर कर्ज लेने वालों पर पड़ेगा। रेपो रेट बढ़ने का मतलब है कि बैंक अपने ग्राहकों के लिए लोन महंगा कर देंगे। इसका सबसे अधिक असर उन सेक्टरों पर होगा जिन पर कर्ज का बोझ ज्यादा है:
- Real Estate: होम लोन और कंस्ट्रक्शन प्रोजेक्ट्स महंगे हो सकते हैं।
- Infrastructure & Auto: कैपिटल-इंटेंसिव सेक्टर होने के कारण इनकी प्रॉफिट मार्जिन पर दबाव बढ़ सकता है।
वहीं, बैंकिंग सेक्टर की बात करें तो शॉर्ट टर्म में बैंकों के 'नेट इंटरेस्ट मार्जिन' में सुधार हो सकता है, लेकिन अगर लोन की मांग घटती है, तो क्रेडिट ग्रोथ के लिए यह एक रिस्क भी हो सकता है। फिलहाल निवेशकों को अक्टूबर की शुरुआत में होने वाली MPC मीटिंग पर नजर रखनी चाहिए, जो बाजार की अगली दिशा तय करेगी।
