SBI Research की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, भारत की 10-साल की सरकारी बॉन्ड यील्ड (G-Sec Yields) मार्च 2027 तक गिरकर **6.75% से 7%** के दायरे में आ सकती है। वर्तमान में यह **7.4%** के करीब है, जो मार्केट और कर्ज की लागत के लिए एक बड़ा संकेत है।
स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) की इकोनॉमिक रिसर्च टीम ने भारतीय सरकारी बॉन्ड मार्केट को लेकर एक पॉजिटिव आउटलुक पेश किया है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि आने वाले समय में 10-साल की G-Sec यील्ड में नरमी आएगी और यह मार्च 2027 तक 6.75% से 7% के स्तर पर स्थिर हो जाएगी। निवेशकों के लिए यह खबर इसलिए अहम है क्योंकि G-Sec यील्ड देश में ब्याज दरों के लिए बेंचमार्क का काम करती है। इसके घटने से कंपनियों के लिए कर्ज लेना सस्ता हो जाता है।
बाजार में फिलहाल क्या स्थिति है?
अभी 10-साल की यील्ड 7.38% से 7.40% के बीच ट्रेड कर रही है। हालांकि SBI की रिपोर्ट में यह भी चेतावनी दी गई है कि शॉर्ट टर्म में कुछ उतार-चढ़ाव आ सकते हैं। ग्लोबल मार्केट, खासकर US Treasury यील्ड में हलचल के कारण घरेलू यील्ड अस्थायी रूप से 7.6% तक भी जा सकती है, लेकिन इसके बाद इसमें गिरावट का सिलसिला शुरू होने की उम्मीद है।
ग्लोबल और घरेलू कारक
भारतीय बॉन्ड मार्केट की दिशा US-India बॉन्ड यील्ड के अंतर (Spread) पर निर्भर करती है। फिलहाल US 10-वर्षीय ट्रेजरी यील्ड 4.9% के आसपास है। भले ही ग्लोबल इन्फ्लेशन के चलते इसमें 5.25% से 5.35% तक जाने का जोखिम हो, लेकिन लॉन्ग टर्म में यह 4.75% के बेसलाइन पर स्थिर हो सकती है।
सरकार की रणनीति
घरेलू स्तर पर, सरकार बॉन्ड की सप्लाई को नियंत्रित करने के लिए सक्रिय कदम उठा रही है। बाजार में लगभग ₹1.52 लाख करोड़ की अतिरिक्त सप्लाई का दबाव है। इसे कम करने के लिए सरकार ने बॉन्ड स्विच और बायबैक के जरिए ग्रॉस बॉरोइंग को करीब ₹1.23 लाख करोड़ तक कम कर दिया है, जो यील्ड को कंट्रोल रखने में मददगार साबित हो रहा है।
निवेशकों को अब RBI की पॉलिसी, कच्चे तेल के दाम और ग्लोबल इन्फ्लेशन डेटा पर पैनी नजर रखने की सलाह दी गई है, क्योंकि ये फैक्टर तय करेंगे कि यील्ड का सफर अनुमानित दायरे में रहता है या ग्लोबल वोलैटिलिटी इसमें कोई नया मोड़ लाती है।
