कोर्ट ने देरी को दरकिनार कर सुनाया फैसला
कमीशन ने यह अहम फैसला सुनाते हुए कहा कि पति/पत्नी की मृत्यु के बाद होने वाले स्वाभाविक दुख और 'मानसिक आघात' (mental shock) के चलते क्लेम फाइल करने में देरी होना स्वाभाविक है। इसी दलील के आधार पर, नागपुर कंज्यूमर फोरम ने State Bank of India (SBI) के उस बचाव को खारिज कर दिया, जिसमें बैंक 90 दिन की तय समय-सीमा का हवाला दे रहा था।
बैंक की दलीलें खारिज
SBI ने यह भी दलील दी थी कि मृतक ने 'MasterCard Classic' डेबिट कार्ड इस्तेमाल किया था, जिसमें कोई बीमा सुरक्षा नहीं थी, और बैंक अलग से बीमा दस्तावेज जारी नहीं करता। हालांकि, कमीशन को ऐसा कोई सबूत नहीं मिला कि 'MasterCard Classic' कार्ड कवरेज से बाहर थे। सबूतों से पता चला कि अन्य कार्डधारकों को बिना किसी अतिरिक्त लागत के बीमा का लाभ मिल रहा था, ऐसे में SBI का अलग रवैया साफ तौर पर 'सेवा में कमी' (deficiency in service) थी।
क्या है आदेश?
जिला उपभोक्ता फोरम ने SBI को आदेश दिया है कि वह ₹5 लाख की बीमा राशि, साथ ही क्लेम फाइल करने की तारीख (5 सितंबर 2019) से 6% सालाना की दर से ब्याज का भुगतान करे। इसके अलावा, मानसिक पीड़ा और कानूनी खर्चों के लिए बैंक को ₹10,000 अतिरिक्त देने का भी निर्देश दिया गया है। कमीशन ने क्लेम रिजेक्ट करने के बैंक के फैसले को अनुचित ठहराया।