State Bank of India के इकोनॉमिस्ट्स ने विदेशी निवेशकों के लिए लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स (LTCG) टैक्स हटाने का प्रस्ताव दिया है। साल 2026 में विदेशी निवेशकों ने भारतीय बाजार से **₹3 लाख करोड़** से ज्यादा की निकासी की है, जिसे रोकने के लिए यह कदम जरूरी बताया गया है।
टैक्स स्ट्रक्चर में बदलाव की मांग
SBI की इकोनॉमिक रिसर्च टीम ने सरकार को सलाह दी है कि विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) पर लगने वाले लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स टैक्स को खत्म कर दिया जाए। वर्तमान में लिस्टेड इक्विटी और म्यूचुअल फंड पर 12.5% का LTCG टैक्स लगता है, जिसे इकोनॉमिस्ट्स विदेशी निवेशकों के लिए एक बड़ी बाधा मान रहे हैं। बैंक का मानना है कि इस टैक्स को हटाने से बाजार की प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी और विदेशी पूंजी की वापसी संभव हो सकेगी।
क्यों हो रही है रिकॉर्ड बिकवाली?
भारतीय बाजार से निवेशकों की दूरी का मुख्य कारण ग्लोबल मैक्रो-इकोनॉमिक बदलाव हैं। क्रूड ऑयल की ऊंची कीमतें, मजबूत डॉलर और अमेरिका में बढ़ती ट्रेजरी यील्ड्स (Treasury Yields) के कारण विदेशी निवेशक भारतीय बाजार से अपना पैसा निकालकर अमेरिकी बाजारों की ओर रुख कर रहे हैं। साथ ही, नॉर्थ एशिया के आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़े मार्केट्स में निवेश बढ़ने से भी भारत में लिक्विडिटी का दबाव बढ़ा है।
बाजार में स्थिरता और उम्मीदें
जून 2026 में सरकार ने सरकारी बॉन्ड्स (G-Secs) के लिए FPIs को टैक्स छूट दी थी, जिसका असर डेट मार्केट पर सकारात्मक रहा था। अब एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर ऐसा ही 'टैक्स रेशनलाइजेशन' इक्विटी मार्केट के लिए किया जाता है, तो यह बाजार के लिए एक बड़ा कॉन्फिडेंस बूस्टर साबित होगा।
निवेशकों के लिए जरूरी बात
मौजूदा समय में विदेशी बिकवाली के चलते रुपये में लगातार कमजोरी देखी जा रही है। हालांकि, टैक्स हटाने का सुझाव अभी केवल एक सिफारिश है, लेकिन आने वाले समय में फाइनेंस मिनिस्ट्री के किसी भी आधिकारिक बयान पर निवेशकों की नजर बनी रहनी चाहिए। बाजार की स्थिरता और लिक्विडिटी के स्तर पर सरकार का कोई भी नया नीतिगत बदलाव बड़ा असर डाल सकता है।
