SBI Results: दमदार लोन ग्रोथ, पर मुनाफे पर क्यों लगा ब्रेक? | SBI Q3 FY26 Earnings

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
SBI Results: दमदार लोन ग्रोथ, पर मुनाफे पर क्यों लगा ब्रेक? | SBI Q3 FY26 Earnings
Overview

State Bank of India (SBI) अपने दिसंबर तिमाही (Q3 FY26) के नतीजे जल्द पेश करने वाला है। एनालिस्ट्स का अनुमान है कि SBI की लोन बुक में सालाना करीब **13%** की ज़बरदस्त बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। हालांकि, पिछले साल के निचले बेस इफेक्ट के चलते प्रोविजन्स में आई भारी बढ़ोतरी की वजह से नेट प्रॉफिट ग्रोथ धीमी रहने की संभावना है।

SBI अपने दिसंबर क्वार्टर (Q3 FY26) के नतीजे 7 फरवरी को पेश करने जा रहा है। बाज़ार के विश्लेषकों की मानें तो, बैंक की लोन बुक में सालाना करीब 13% की ज़बरदस्त बढ़ोतरी हुई है, जो कई दूसरे बैंकों से बेहतर है। यह भारतीय बैंकिंग सेक्टर में देखी जा रही व्यापक क्रेडिट ग्रोथ के अनुरूप है।

लेकिन, इस दमदार परफॉरमेंस के बावजूद, बैंक के बॉटम लाइन यानी नेट प्रॉफिट पर असर पड़ने की उम्मीद है। एनालिस्ट्स के अनुसार, नेट प्रॉफिट में सालाना करीब 4% की मामूली बढ़ोतरी ही संभव है। इसकी मुख्य वजह प्रोविजन्स में आई एक बड़ी, सालाना बढ़ोतरी है। खास बात यह है कि पिछले साल के दिसंबर क्वार्टर (Q3 FY25) में प्रोविजन्स काफी कम थे, क्योंकि एक खास कोविड-संबंधित अकाउंट का निपटारा हो गया था। इसी लो बेस इफेक्ट की वजह से इस बार प्रोविजन्स में बढ़ोतरी दिख रही है, जो सीधे तौर पर नेट प्रॉफिट को प्रभावित करेगी।

दूसरी ओर, नेट इंटरेस्ट इनकम (NII) में करीब 8% की बढ़ोतरी का अनुमान है, और नेट इंटरेस्ट मार्जिन (NIMs) भी स्थिर बने रहने की उम्मीद है। बाज़ार की नज़रें मैनेजमेंट की कमेंट्री पर होंगी, खासकर RBI द्वारा पॉलिसी रेट्स को स्थिर रखने के फैसले के बाद मार्जिन का भविष्य कैसा रहेगा। हालांकि, खर्चों पर लगाम और स्थिर अन्य आय (Other Income) के दम पर प्री-प्रोविजन ऑपरेटिंग प्रॉफिट (PPoP) में 18-19% की अच्छी-खासी बढ़ोतरी की उम्मीद है।

SBI का पीई रेश्यो (P/E Ratio) लगभग 11.36x से 12.6x के बीच है, जो बैंकिंग इंडस्ट्री के औसत के बराबर है, लेकिन कई दूसरे पब्लिक सेक्टर बैंकों से ज़्यादा है। बैंक का मार्केट कैपिटलाइजेशन (Market Capitalization) करीब ₹9.52 लाख करोड़ से ₹9.90 लाख करोड़ के बीच है।

अगर तुलना करें, तो SBI की 13% की लोन ग्रोथ अच्छी मानी जा रही है। उदाहरण के लिए, इंडियन बैंक ने अपनी Q3 FY26 में 14.5% की एडवांस ग्रोथ रिपोर्ट की थी। बैंक ऑफ बड़ौदा ने भी Q3 FY26 में स्थिर परफॉरमेंस दिखाई, हालांकि उनकी नेट इंटरेस्ट इनकम सालाना आधार पर सपाट रही।

बैंकिंग सेक्टर में क्रेडिट ग्रोथ मज़बूत बनी हुई है, लेकिन डिपॉजिट ग्रोथ पर दबाव एक चिंता का विषय हो सकता है। हालांकि, SBI की एसेट क्वालिटी (Asset Quality) लगातार मज़बूत बनी हुई है। ग्रॉस एनपीए (GNPA) में पिछली अवधियों की तुलना में काफी कमी आई है, और क्रेडिट कॉस्ट (Credit Costs) भी कम रहने की उम्मीद है।

नतीजों से ठीक पहले, SBI के शेयर में शुक्रवार को मामूली 0.70% की गिरावट आई थी और यह ₹1,066 पर बंद हुआ था। पिछले छह महीनों में, स्टॉक ने निवेशकों को करीब 32% का रिटर्न दिया है। एनालिस्ट्स के प्राइस टारगेट (Price Targets) की बात करें तो, यह औसतन ₹1,051.25 से ₹1,112.31 के बीच है, जो मौजूदा स्तरों से ज़्यादा बड़ी तेज़ी की गुंजाइश कम होने का संकेत देता है। ऐसा लगता है कि बाज़ार ने उम्मीद के मुताबिक परफॉरमेंस को पहले ही डिस्काउंट कर लिया है।

निवेशकों की नज़रें मैनेजमेंट की आगे की कमेंट्री पर होंगी। खासकर, FY26 के लिए बैंक की 12-14% लोन ग्रोथ गाइडेंस को लेकर उनके क्या विचार हैं, यह अहम होगा। इंडस्ट्री में एसेट क्वालिटी के ट्रेंड्स पर SBI का नज़रिया भी महत्वपूर्ण है। मौजूदा इंटरेस्ट रेट माहौल में मार्जिन को लेकर उनकी क्या राय है, यह भविष्य की प्रॉफिटेबिलिटी का अहम इंडिकेटर होगा। कई एनालिस्ट्स 'बाय' रेटिंग बनाए हुए हैं, लेकिन 12.6x के पीई रेश्यो पर वैल्यूएशन को लेकर सवाल बने हुए हैं।

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