SBI के ग्राहकों को ₹858 लाख का रिफंड! साइबर फ्रॉड के आंकड़े बदले, RBI के नए नियमों का असर

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
SBI के ग्राहकों को ₹858 लाख का रिफंड! साइबर फ्रॉड के आंकड़े बदले, RBI के नए नियमों का असर

SBI ग्राहकों के लिए साइबर फ्रॉड से जुड़ा एक बड़ा अपडेट आया है। वित वर्ष 2025-26 में, बैंक ने साइबर फ्रॉड के चलते ग्राहकों को **₹858.72 लाख** का रिफंड दिया है, जो पिछले साल के **₹12.38 लाख** के मुकाबले लगभग 70 गुना ज्यादा है। हालांकि, रिपोर्ट किए गए फ्रॉड केसों की संख्या 13,000 से घटकर सिर्फ 20 रह गई है।

RBI के नए नियमों का खेल

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, SBI ने वित वर्ष 2025-26 में ग्राहकों को साइबर फ्रॉड के लिए ₹858.72 लाख का भुगतान किया। यह वित वर्ष 2023-24 के ₹12.38 लाख के आंकड़े से एक बड़ी उछाल है। वहीं, दूसरी तरफ, रिपोर्ट किए गए फ्रॉड केसों की संख्या 13,319 से घटकर सिर्फ 20 रह गई है।

सरकार ने साफ किया है कि केसों की संख्या में यह गिरावट धोखाधड़ी की घटनाओं में कमी का संकेत नहीं है। असल वजह भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के 15 जुलाई, 2024 से लागू हुए फ्रॉड रिस्क मैनेजमेंट पर नए मास्टर डायरेक्शन्स हैं।

क्या हैं नए नियम?

इन बदले हुए नियमों के तहत, बैंकों को अब डिजिटल ट्रांज़ैक्शन्स को तभी फ्रॉड के रूप में रिपोर्ट करना होगा जब आंतरिक जांच में इसकी पुष्टि हो जाए। पहले, बैंक सभी संदिग्ध या विवादित मामलों को भी रिपोर्ट में शामिल कर लेते थे। इसी बदलाव के कारण रिपोर्ट किए गए केसों की संख्या कम हुई है, जबकि कन्फर्मड फ्रॉड के मामलों में पीड़ितों को मुआवजा देने की प्रक्रिया ज़्यादा व्यवस्थित हुई है, जिससे रिफंड की राशि बढ़ी है।

SBI के नतीजों पर असर?

वित्तीय लिहाज से देखें तो, यह रिफंड की राशि SBI की कुल कमाई का एक छोटा सा हिस्सा है। SBI ने वित वर्ष 2026 की पहली तिमाही में 10% की बढ़त के साथ ₹21,121 करोड़ का नेट प्रॉफिट दर्ज किया है। साइबर फ्रॉड रिफंड में बढ़ोतरी डिजिटल जोखिमों के प्रबंधन की लागत को दर्शाती है, लेकिन यह बैंक की समग्र लाभप्रदता के लिए फिलहाल बड़ा खतरा नहीं है।

बाजार की चाल और निवेशकों के लिए सलाह

बाजार में, 10 अगस्त, 2026 को SBI के शेयर में 1.44% की मामूली गिरावट देखी गई, जो पब्लिक सेक्टर बैंक इंडेक्स में मुनाफावसूली के बड़े ट्रेंड का हिस्सा थी। यह किसी खास खबर पर प्रतिक्रिया नहीं थी।

निवेशकों को बैंक की डिजिटल ग्रोथ और सुरक्षा के बीच संतुलन बनाने की क्षमता पर नज़र रखनी चाहिए। RBI लगातार साइबर सुरक्षा का आकलन कर रहा है। भले ही रिपोर्टिंग के नियमों में बदलाव से कन्फर्मड फ्रॉड की तस्वीर साफ हुई है, लेकिन फिशिंग या UPI फ्रॉड जैसे डिजिटल बैंकिंग के जोखिम अभी भी मौजूद हैं, जिनका प्रबंधन बैंक को अपनी ग्रोथ स्ट्रैटेजी के साथ-साथ करना होगा।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.