State Bank of India (SBI) ने साफ किया है कि हाल ही में मिले **$10.9 बिलियन** के FCNR(B) डिपॉजिट से बैंक की प्रॉफिटेबिलिटी पर असर नहीं पड़ेगा। चेयरमैन CS Setty के मुताबिक, इन सस्ते फंड्स का इस्तेमाल महंगे डोमेस्टिक डिपॉजिट को बदलने में किया जाएगा, जिससे NIM को **3%** के ऊपर बनाए रखने में मदद मिलेगी।
विदेशी फंड का स्मार्ट इस्तेमाल
बैंक ने अपनी रणनीति साफ कर दी है। इस भारी भरकम लिक्विडिटी को बेकार बैठने देने के बजाय, SBI इसे महंगे डोमेस्टिक डिपॉजिट्स को चुकाने के लिए इस्तेमाल करेगा। इस 'कॉस्ट ऑफ फंड्स' को घटाने वाली कवायद से बैंक को उम्मीद है कि वह अपनी प्रॉफिटेबिलिटी को सुरक्षित रख पाएगा।
शानदार रहे नतीजे
हाल ही में आए FY27 की दूसरी तिमाही के आंकड़ों पर नजर डालें, तो SBI का स्टैंडअलोन नेट प्रॉफिट ₹23,038 करोड़ रहा, जो साल-दर-साल 14% की बढ़ोतरी दिखाता है। बैंक का डोमेस्टिक NIM 3.11% पर रहा, जिसमें पिछली तिमाही के मुकाबले 11 बेसिस पॉइंट्स का सुधार आया है। हालांकि, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज पर SBI के शेयर ₹970.25 पर बंद हुए, जिसमें करीब 1.7% की गिरावट दिखी।
आगे की राह और चुनौतियां
बैंक ने क्रेडिट ग्रोथ का लक्ष्य 14% से 15% और डिपॉजिट ग्रोथ का लक्ष्य 10% से 11% रखा है। निवेशकों को ध्यान रखना चाहिए कि रिटेल डिपॉजिट्स के लिए बढ़ती प्रतिस्पर्धा बैंक के मार्जिन पर दबाव डाल सकती है। इसके अलावा, Reserve Bank of India की मॉनेटरी पॉलिसी और महंगाई जैसे वैश्विक कारक भी आने वाले समय में बैंक की वर्किंग पर असर डाल सकते हैं।
