SBI के चेयरमैन CS Setty ने अनुमान जताया है कि दिसंबर में RBI रेपो रेट में **50 बेसिस पॉइंट्स** की बढ़ोतरी कर सकता है, जिससे लोन की मांग में नरमी आने की संभावना है।
ब्याज दरों में बढ़ोतरी के संकेत
SBI के चेयरमैन CS Setty ने बैंकिंग जगत में हलचल मचाते हुए यह अनुमान जताया है कि दिसंबर 2026 तक RBI रेपो रेट में 50 बेसिस पॉइंट्स का इजाफा कर सकता है। इस फैसले के बाद कर्ज लेना और महंगा हो जाएगा, जिसका सीधा असर कंज्यूमर बिहेवियर और बैंकिंग सेक्टर के मुनाफे पर पड़ेगा।
लोन डिमांड और कंजम्पशन पर असर
जैसे-जैसे ब्याज दरें बढ़ेंगी, नॉन-एसेंशियल आइटम्स और लग्जरी खरीदारी के लिए लिए जाने वाले लोन की मांग में कमी आने की उम्मीद है। हालांकि रियल इकॉनमी अभी भी डिमांड को सपोर्ट कर रही है, लेकिन ऊंची ब्याज दरों के कारण ग्राहक अब बड़ी खरीदारी को लेकर सतर्क हो गए हैं। पिछले कुछ क्वार्टर्स में बैंकों की कमाई का मुख्य जरिया क्रेडिट ग्रोथ रहा है, जिसे अब इस स्थिति के कारण चुनौती मिल सकती है।
डिपॉजिट्स की बदलती चाल
मार्केट में डिपॉजिट्स को लेकर कॉम्पिटिशन काफी बढ़ गया है। आम निवेशक अब बचत खातों से पैसा निकालकर हाई-यील्ड वाले फिक्स्ड डिपॉजिट्स और अन्य फाइनेंशियल इंस्ट्रूमेंट्स की ओर रुख कर रहे हैं। इससे बैंकों के लिए फंड की लागत बढ़ रही है, जिसका सीधा दबाव उनके नेट इंटरेस्ट मार्जिन (NIM) पर पड़ सकता है।
रिटेल बॉरोअर्स के लिए चेतावनी
SBI लीडरशिप ने रिटेल बॉरोअर्स के सामने आने वाली दिक्कतों की ओर भी इशारा किया है। जिन परिवारों पर पहले से कर्ज का बोझ ज्यादा है, उनके लिए EMI का बढ़ना वित्तीय तनाव पैदा कर सकता है। हालांकि बैंकिंग सिस्टम फिलहाल सुरक्षित नजर आता है, लेकिन व्यक्तिगत स्तर पर कर्जदार दबाव महसूस कर सकते हैं। निवेशकों को अब इस बात पर नजर रखनी होगी कि बैंक कैसे बढ़ती लागत के बीच अपने मुनाफे को सुरक्षित रखते हैं।
