SBI के चेयरमैन CS Setty ने Union Budget 2026 के बाद कहा है कि इस बार का बजट सर्विस और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर्स पर खास जोर दे रहा है, जिससे आने वाले समय में कॉर्पोरेट क्रेडिट ग्रोथ को जबरदस्त रफ्तार मिलने की उम्मीद है। उन्होंने कहा कि बजट में 'सनराइज सेक्टर्स' और MSMEs (सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम) को मिले सपोर्ट से लोन की मांग बढ़ेगी। यह मौजूदा कॉर्पोरेट क्रेडिट डिमांड में पहले से हो रही बढ़ोतरी को और तेज करेगा, खासकर उन बड़ी कंपनियों के लिए जो उभरते हुए सेक्टर्स में निवेश कर रही हैं।
सरकार ने इस दिशा में खास कदम उठाए हैं। उदाहरण के लिए, जॉब क्रिएशन करने वाले भविष्य के उद्यमों को सपोर्ट करने के लिए ₹10,000 करोड़ का SME Growth Fund बनाया गया है, और Self-Reliant India Fund के लिए ₹2,000 करोड़ का अतिरिक्त फंड दिया गया है।
हालांकि, दूसरी तरफ, ₹17.2 ट्रिलियन के सरकारी उधारी लक्ष्य को लेकर बॉन्ड मार्केट में चिंताएं बढ़ गई हैं। यह रकम मार्केट की उम्मीदों (₹16-16.5 ट्रिलियन) से काफी ज्यादा है। ज्यादा सरकारी उधार अक्सर बॉन्ड यील्ड पर दबाव बनाता है और कैपिटल कॉस्ट को महंगा कर सकता है। इसी आशंका के चलते बजट के बाद पब्लिक सेक्टर बैंक (PSU) स्टॉक्स पर दबाव देखा गया, जिसमें SBI का शेयर भी रविवार को करीब 5.3% तक गिर गया।
लेकिन SBI चेयरमैन CS Setty ने निवेशकों को सलाह दी कि वे इन नंबरों को लेकर तुरंत कोई निष्कर्ष न निकालें। उन्होंने कहा कि पिछले साल की तरह इस बार भी सरकारी बॉन्ड बायबैक (जिसमें ₹80,000 करोड़ का बायबैक शामिल था) और ट्रेजरी बिल एडजेस्टमेंट जैसी चीजें उधारी के असली बोझ को कम कर सकती हैं। Setty ने बजट के फिस्कल अनुमानों को भी 'कंजर्वेटिव' बताया, यानी सरकार ने थोड़ा एहतियात बरतते हुए रेवेन्यू अनुमानों को कम और उधारी को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया हो सकता है।
State Bank of India भारत के बड़े पब्लिक सेक्टर बैंकों में से एक है। फरवरी 2026 की शुरुआत में, इसका P/E रेश्यो लगभग 12.09x था और जनवरी 2026 के अंत तक इसका मार्केट कैप करीब ₹9.94 ट्रिलियन था। FY24 तक, SBI के पास देश की कुल डिपॉजिट का लगभग 22.55% और नेट एडवांसेज का 19.06% मार्केट शेयर है।
कुल मिलाकर, बजट का मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस सेक्टर्स को बढ़ावा देने का लक्ष्य देश की इकोनॉमी को मजबूती देने और रोजगार पैदा करने के सरकारी एजेंडे के अनुरूप है। साथ ही, बैंकिंग सेक्टर की समीक्षा के लिए एक हाई-लेवल कमेटी का प्रस्ताव भविष्य में बड़े स्ट्रक्चरल बदलावों का संकेत दे सकता है।